“पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता पर बोझ डाल रही है और राहत देने के बजाय टैक्स वसूल रही है।“
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आठ दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की कमाई को “किश्तों में लूटने” का काम कर रही है।
सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को घेरा
खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों ने ईंधन कीमतों में राहत देकर नागरिकों को सहारा दिया, जबकि भारत में लगातार कीमतें बढ़ाकर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचाया गया।
सरकार पर टैक्स के जरिए बोझ बढ़ाने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कर वसूल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होने का फायदा उपभोक्ताओं को देने के बजाय करों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाया।
खरगे ने कहा कि लगातार बढ़ रही कीमतों से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है और इससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
कई देशों के उदाहरण भी दिए
अपने बयान में उन्होंने विभिन्न देशों की नीतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई देशों ने ईंधन पर करों में कटौती कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि—
- इटली ने एक्साइज ड्यूटी कम की
- ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन करों में राहत दी
- जर्मनी ने टैक्स कम कर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की
- ब्रिटेन और आयरलैंड ने राहत पैकेज लागू किए
हाल में तीसरी बार बढ़े दाम
शनिवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर वृद्धि की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
- पेट्रोल: लगभग 87 पैसे प्रति लीटर महंगा
- डीजल: लगभग 91 पैसे प्रति लीटर महंगा
बीते दिनों हुई बढ़ोतरी को जोड़कर देखें तो दस दिनों के भीतर ईंधन कीमतों में कुल बढ़ोतरी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
बढ़ सकती है महंगाई की चिंता
ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य सामग्री, रोजमर्रा के सामान और माल ढुलाई पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
ईंधन कीमतों के मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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