ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, वाद मित्र नियुक्ति के खिलाफ जिला जज कोर्ट में रिवीजन याचिका

वाद मित्र नियुक्ति को लेकर जिला जज कोर्ट में दाखिल हुई रिवीजन याचिका, अदालत में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें

ज्ञानवापी मामले में वर्ष 2019 की वाद मित्र नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर वाराणसी कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अगली तारीख 8 जुलाई तय की। जानिए ज्ञानवापी विवाद, विजय शंकर रस्तोगी, अनुष्का तिवारी और अदालत में हुई बहस की पूरी जानकारी।

वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े वर्ष 1991 के सबसे पुराने वाद में वर्ष 2019 में की गई वाद मित्र नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली तारीख 8 जुलाई तय कर दी है। मामला अब अपर जिला जज सप्तम विकास श्रीवास्तव की अदालत में विचाराधीन है।

यह विवाद उस मूल वाद से जुड़ा है, जिसमें भगवान आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, राग-भोग, पूजा-अर्चना और मंदिर पुनर्निर्माण की मांग की गई थी। वर्ष 1991 में दायर इस वाद में तत्कालीन मुख्य पुजारी पंडित सोमनाथ व्यास, पंडित रामरंग शर्मा और पंडित हरिहर पांडेय वादी थे। मुकदमा अधिवक्ता बाबू दान बहादुर सिंह और पंडित संकटा प्रसाद तिवारी के माध्यम से दाखिल कराया गया था।

वर्ष 2019 की नियुक्ति पर उठाए गए सवाल

अधिवक्ता अनुष्का तिवारी की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित हरिहर पांडेय की स्थिति का लाभ उठाकर कथित रूप से षड्यंत्रपूर्वक वाद मित्र नियुक्ति प्राप्त की गई थी।

याचिका में यह भी कहा गया कि बाद में वाद को अवर न्यायालय से जिला जज न्यायालय में स्थानांतरित कर अन्य ज्ञानवापी मामलों के साथ समेकित किए जाने और मुख्य वाद बनाए जाने का विरोध किया गया। साथ ही राज्य सरकार, केंद्र सरकार और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट को आवश्यक पक्षकार के रूप में शामिल नहीं किया गया, जिससे मुस्लिम पक्ष को लाभ मिलने का आरोप लगाया गया।

विजय शंकर रस्तोगी और मसाजिद कमेटी ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान वर्ष 2019 में वाद मित्र नियुक्त किए गए विजय शंकर रस्तोगी की ओर से अदालत में कहा गया कि दाखिल रिवीजन याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। वहीं अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने भी इस पक्ष का समर्थन किया।

दूसरी ओर अधिवक्ता अनुष्का तिवारी ने अदालत में दलील दी कि यह कोई निजी संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भगवान के अधिकारों से जुड़ा जनप्रतिनिधि वाद है। उन्होंने कहा कि यदि कोई वाद मित्र भगवान के हितों के विपरीत कार्य करता है, तो भक्तों को न्यायालय को इसकी जानकारी देने का अधिकार है।

मूल पत्रावली तलब करने की मांग

अधिवक्ता अनुष्का तिवारी ने मामले को संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए अदालत से मूल पत्रावली तलब करने की मांग भी की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय कर दी।

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