नवाबगंज पक्षी विहार के बाद उन्नाव में नई पहल, 97 बीघा जलक्षेत्र को मिलेगा संरक्षण

नवाबगंज पक्षी विहार के बाद पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल, मेला रामकुंवर और कुशराजपुर गांवों के जलस्रोतों का होगा विकास

उन्नाव जिले के बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में 97 बीघा भूमि को वेटलैंड घोषित किया गया है। गंजमुरादाबाद और आसपास के गांवों में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से उन्नाव में पर्यटन विकास और हरियाली बढ़ने की उम्मीद है। यह पहल उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में पर्यावरण संरक्षण की बड़ी योजना के रूप में देखी जा रही है।

उन्नाव। जनपद में पर्यावरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक और बड़ी पहल की है। नवाबगंज पक्षी विहार के बाद अब बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के गंजमुरादाबाद के पास स्थित मेला रामकुंवर और कुशराजपुर गांवों में लगभग 97 बीघा वेटलैंड क्षेत्र को संरक्षित किए जाने की तैयारी है। इस कदम से क्षेत्र में न केवल जल संरक्षण मजबूत होगा, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी नया विस्तार मिलेगा।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, दोनों गांवों में मौजूद तीन प्रमुख जलस्रोतों को वेटलैंड के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें मेला रामकुंवर का लगभग 52 बीघा बड़ा तालाब और 25 बीघा क्षेत्र में फैला ‘चकरा तालाब’ शामिल है, जहां लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या भी बनी हुई है। इसके अलावा कुशराजपुर गांव में लगभग 20 बीघा क्षेत्र में ‘भिलोई तालाब’ और ‘ज्वार तालाब’ स्थित हैं।

सरकारी योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करना, भूजल स्तर को सुधारना और हरियाली को बढ़ावा देना है। गंगा नदी से करीब 6 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह क्षेत्र चिकनी और दोमट मिट्टी वाला है, जो जल संरक्षण और पौधारोपण के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर तालाबों के आसपास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और हरियाली की कमी को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती भी बनी हुई है। वेटलैंड मानकों के अनुसार क्षेत्र को विकसित करने के लिए अवैध कब्जों को हटाना और सघन वृक्षारोपण करना आवश्यक होगा।

पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है। कुशराजपुर में स्थित देवी फूलमती मंदिर का पहले ही पर्यटन विभाग द्वारा जीर्णोद्धार किया जा चुका है। ऐसे में वेटलैंड बनने के बाद यह क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि उन्नाव के इस हिस्से में एक नया इको-टूरिज्म मॉडल भी विकसित हो सकेगा।

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