“Karnataka CM News 2026: कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। सिद्धारमैया के इस्तीफे और डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस नेताओं और समर्थकों में हलचल बढ़ गई है। जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम।“
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार को घटनाक्रम तेजी से बदलते नजर आए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की अटकलों के बीच कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सिद्धारमैया आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और डीके शिवकुमार शुक्रवार को नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।

हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों, नेताओं के बयानों और समर्थकों की गतिविधियों ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है।
“कल शपथ लेंगे डीके शिवकुमार”
कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकर्ता उमा शंकर ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि डीके शिवकुमार शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और बड़े स्तर पर जश्न की तैयारी की जा रही है।
इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार रात कैबिनेट सहयोगियों के साथ हुई बैठक में इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

पैर छूकर लिया आशीर्वाद, गले मिलकर दिया एकता का संदेश
गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर हुई नाश्ते की बैठक ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जब मुख्यमंत्री आवास पहुंचे तो उन्होंने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और बाद में दोनों नेताओं ने गले मिलकर बातचीत की।
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सम्मान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर संभावित बदलाव से पहले एकता का सार्वजनिक संदेश भी हो सकता है।
राज्यपाल की गैरमौजूदगी से बढ़ा सस्पेंस
मुख्यमंत्री के संभावित इस्तीफे के बीच राज्यपाल थावरचंद गहलोत का बेंगलुरु से बाहर होना भी चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल बुधवार देर रात मुंबई रवाना हो गए थे और उसके बाद इंदौर जाने का कार्यक्रम है।

हालांकि कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इससे इस्तीफा प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया दोपहर बाद राज्यपाल कार्यालय में अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, भले ही राज्यपाल स्वयं मौजूद न हों।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने बुधवार को राज्यपाल से मुलाकात का समय भी मांगा था। ऐसे में राज्यपाल का अचानक बाहर जाना राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
समर्थकों में जश्न का माहौल
डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबरों के बीच उनके समर्थकों में उत्साह साफ दिखाई दिया। बेंगलुरु स्थित उनके आवास के बाहर कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और जश्न मनाया।

बेंगलुरु के पूर्व मेयर आर. संपत समेत कई समर्थक शिवकुमार के घर पहुंचे और उन्हें अग्रिम बधाई देने लगे। समर्थकों का कहना है कि संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में डीके शिवकुमार की बड़ी भूमिका रही है, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए।
विपक्ष ने कांग्रेस पर साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस का अंदरूनी सत्ता संघर्ष राज्य के विकास को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक समीकरणों और कुर्सी की लड़ाई में उलझी हुई है, जबकि किसानों, युवाओं और आम जनता के मुद्दे पीछे छूट गए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

जातीय सर्वे रिपोर्ट पर सिद्धारमैया का जोर
इस्तीफे की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया पर जातीय और सामाजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को लेकर लंबा संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट सामाजिक न्याय लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सिद्धारमैया ने बताया कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग को सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया था। अब इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि यह राज्य में सामाजिक न्याय की दिशा तय करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया का यह संदेश उनके राजनीतिक एजेंडे और सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाने का संकेत भी हो सकता है।
कांग्रेस के सामने संतुलन की चुनौती
कर्नाटक कांग्रेस लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच शक्ति संतुलन साधने की कोशिश करती रही है। 2023 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों खेमों में खींचतान सामने आई थी।
तब पार्टी हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया था। अब लगभग तीन साल बाद फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस दक्षिण भारत में अपनी सबसे मजबूत सरकार को किसी भी तरह अस्थिर नहीं होने देना चाहती। ऐसे में आने वाले 24 घंटे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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