“IMD के अनुसार मानसून 2026 अब 7 दिन बाद केरल पहुंचेगा। अल-नीनो के असर से यूपी, बिहार, एमपी समेत कई राज्यों में कम बारिश और जून-जुलाई में हीटवेव की आशंका जताई गई है। जानिए किसानों, बिजली और महंगाई पर इसका असर।“
नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक इस बार तय समय से देरी से होगी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को बताया कि श्रीलंका के आसपास बने कम दबाव और तेज तूफानी हवाओं के कारण मानसून फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अब इसके करीब सात दिन बाद केरल तट पर पहुंचने की संभावना है।
आमतौर पर केरल में मानसून के आगमन की तारीख 1 जून मानी जाती है। हालांकि मौसम विभाग ने पहले अनुमान जताया था कि इस बार मानसून 26 मई तक पहुंच जाएगा, लेकिन अब परिस्थितियां बदलने से इसमें करीब 10 दिन की देरी हो गई है।
सामान्य से कम होगी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार सामान्य औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। इससे पहले अप्रैल में विभाग ने 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान जताया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का सीधा असर खेती, जल भंडारण और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है।
जून-जुलाई में भी चलेगी हीटवेव
आईएमडी ने चेतावनी दी है कि मानसून के बावजूद जून और जुलाई में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है।
सामान्य तौर पर इन महीनों में तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, लेकिन इस बार तापमान औसतन 2 से 3 डिग्री अधिक रहने की आशंका है।
यूपी, बिहार और एमपी में कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने कहा है कि जून महीने में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
विशेष चिंता की बात यह है कि मानसून के “कोर जोन” यानी वे इलाके जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर करती है, वहां भी कम वर्षा का अनुमान है। इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना तथा उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं।
5 दिन से केरल तट के पास अटका मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक मानसून पिछले पांच दिनों से केरल तट से करीब 30 से 35 किलोमीटर दूर अटका हुआ है। अगले दो-तीन दिनों तक इसके तेजी से आगे बढ़ने की संभावना भी कम है।
आईएमडी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने कहा कि अब अगले सात दिनों के भीतर मानसून केरल पहुंच सकता है।
अल-नीनो बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की कमजोरी और देरी के पीछे “अल-नीनो” प्रभाव प्रमुख कारण है। अल-नीनो की स्थिति में प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे हवाओं और बारिश के पैटर्न में बदलाव आता है।
इसका असर भारतीय मानसूनी हवाओं पर पड़ता है और बारिश कमजोर हो जाती है। इसके कारण कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बनती हैं।
आम लोगों और किसानों पर असर
कमजोर मानसून का असर सीधे आम लोगों और किसानों की जिंदगी पर पड़ेगा। देश की लगभग 64 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और कुल खेती योग्य जमीन का बड़ा हिस्सा आज भी बारिश आधारित है।
बारिश कम होने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे दाल, सब्जियों और खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।
इसके अलावा जलाशयों का जलस्तर घट सकता है, बिजली की मांग बढ़ सकती है और ग्रामीण बाजारों में खरीदारी कमजोर पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर ट्रैक्टर, टू-व्हीलर और अन्य ग्रामीण बाजारों की बिक्री पर भी देखने को मिल सकता है।
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