अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, ड्रोन ठिकानों पर अमेरिकी हमला; जवाब में IRGC ने अमेरिकी बेस को बनाया निशाना

होर्मुज क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां, दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव गहराया

US-Iran Conflict में नया मोड़ आया है। अमेरिका ने ईरान के गोरुक और केशम द्वीप स्थित ड्रोन कंट्रोल और रडार साइट्स पर हमला किया। जवाब में IRGC ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया। जानिए पूरा घटनाक्रम।

नई दिल्ली/तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार और ड्रोन नियंत्रण केंद्रों पर हवाई हमले करने का दावा किया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की बात कही है। दोनों देशों की सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र में नई चिंता पैदा कर दी है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से ईरान के साथ समझौते और तनाव कम करने की बात कर रहे हैं। दूसरी ओर जमीनी स्तर पर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।

ईरानी ड्रोन ठिकानों पर अमेरिकी हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि ये ठिकाने ड्रोन संचालन, हवाई निगरानी और सैन्य नियंत्रण गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे थे।

अमेरिकी सेना के मुताबिक कार्रवाई के दौरान ईरानी हवाई सुरक्षा प्रणाली, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तथा दो एकतरफा हमलावर ड्रोन पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। अमेरिका ने इस कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है।

अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने का दिया हवाला

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था। इसी घटना के जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।

CENTCOM के अनुसार अमेरिकी बलों ने केवल उन सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया जो अमेरिकी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा माने जा रहे थे। अमेरिका ने दावा किया कि अभियान के दौरान उसके किसी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।

ईरान ने भी किया पलटवार

अमेरिकी हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने कहा कि उसने उस अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है जिसका उपयोग ईरानी क्षेत्र में हुए हमले के लिए किया गया था।

हालांकि ईरानी सेना ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उस एयरबेस की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की। इसके बावजूद ईरानी बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि तेहरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के मूड में है।

पिछले सप्ताह भी हुए थे हमले

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले सप्ताह भी दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का दौर चला था।

अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट संचालित एक ईरानी ड्रोन नेटवर्क को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की थी। तब से क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

कूटनीतिक प्रयासों पर भी उठे सवाल

हालिया घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर वाशिंगटन बातचीत और समझौते की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां अविश्वास और टकराव की स्थिति को और मजबूत कर रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों ने संयम नहीं बरता तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

वैश्विक समुदाय की बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और विवाद का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से निकालने की अपील की है।

फिलहाल पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की निगाहें वाशिंगटन तथा तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

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