“मॉनसून 2026 की आधिकारिक शुरुआत केरल से हो गई है। IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंच चुका है। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है और भारी बारिश, बाढ़ तथा भूस्खलन की आशंका जताई गई है।“
तिरुवनंतपुरम। देशभर में लाखों लोगों के इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के केरल तट पर पहुंचने के साथ ही राज्य में व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। चिलचिलाती गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा भी बढ़ गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में केरल के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन चुकी हैं और इसके प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश होने की संभावना है।
कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
भारी बारिश की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अलपुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर और मलप्पुरम जिलों में बुधवार और गुरुवार को भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं पठानमथिट्टा और कोझिकोड में गुरुवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इन जिलों के कुछ इलाकों में कम समय में 11 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा राज्य के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे व्यापक क्षेत्र में भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है।
अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों में जलभराव और अचानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है। वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन एजेंसियों को निगरानी और राहत तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
कमजोर और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार और स्थानीय निकायों ने भी संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी
मौसम विभाग ने केरल और लक्षद्वीप तट के आसपास समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है। इसके चलते मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार समुद्री क्षेत्रों में 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो झोंकों के दौरान 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। खराब मौसम को देखते हुए तटीय इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
प्री-मानसून तैयारियां हुईं तेज
राज्य में मानसून के आगमन से पहले स्थानीय प्रशासन ने नालों, नहरों और जल निकासी मार्गों की सफाई का अभियान तेज कर दिया है। बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए कई नगर निकायों और पंचायतों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
लंबे समय से जारी भीषण गर्मी के बाद अब राज्य में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। मानसून की पहली व्यापक बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और कृषि गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
पूरे देश की नजर रहती है केरल पर
केरल में मानसून का आगमन पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही दक्षिण-पश्चिम मानसून के भारत में प्रवेश का आधिकारिक संकेत होता है। इसके बाद मानसून धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ता है और खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है।
हालांकि मौसम विभाग ने इस वर्ष देश में सामान्य से कम वर्षा की संभावना भी जताई है। ऐसे में मानसून की प्रगति और बारिश के वितरण पर कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था की नजर बनी हुई है।
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