“यूपी में 58 वित्त एवं लेखाधिकारियों का तबादला किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। जानिए किन संस्थानों में हुए प्रशासनिक बदलाव और क्या हैं नई नियुक्तियां।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा (समूह ‘क’) के 58 वित्त एवं लेखाधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। शासन की ओर से जारी आदेश के तहत अधिकारियों को विभिन्न विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों तथा अन्य शासकीय संस्थाओं में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जारी तबादला सूची के अनुसार कई प्रमुख विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है। इनमें सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अलीगढ़ सहित कई महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं।
शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन को मिलेगा बल
शासन के इस फैसले को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में वित्तीय अनुशासन तथा लेखा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वित्त एवं लेखाधिकारी विश्वविद्यालयों के बजट प्रबंधन, वित्तीय स्वीकृतियों, लेखा परीक्षण तथा सरकारी योजनाओं के वित्तीय क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं।
अधिकारियों के स्थानांतरण से विभिन्न संस्थानों में वित्तीय कार्यों के संचालन में नई गति आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही प्रशासनिक आवश्यकताओं और विभागीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल किया गया है।
समयबद्ध कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश
शासन द्वारा जारी आदेश में सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने नए तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों और संस्थानों को भी आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद
राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न विभागों में अधिकारियों के तबादले कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास करती है। इसी क्रम में वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारियों का यह बड़ा तबादला आदेश जारी किया गया है, जिससे विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है।
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