“अमेठी में राहुल गांधी और सांसद केएल शर्मा की बढ़ती सक्रियता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है। वहीं 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और स्मृति ईरानी के सामने संगठन और साख बचाने की चुनौती खड़ी होती दिख रही है।“
अमेठी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही अमेठी का राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है। कभी कांग्रेस का अभेद्य गढ़ रही इस हाई-प्रोफाइल सीट पर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अमेठी सांसद केएल शर्मा की लगातार बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है। वहीं भाजपा के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने की चुनौती खड़ी होती दिख रही है।
राहुल और केएल शर्मा की सक्रियता से कांग्रेस में जोश
लोकसभा चुनाव 2024 में अमेठी सीट पर कांग्रेस की वापसी के बाद पार्टी संगठन लगातार क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहा है। राहुल गांधी के नियमित दौरे और सांसद केएल शर्मा की जमीनी मौजूदगी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अमेठी में अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
स्मृति ईरानी की साख भी दांव पर
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की वरिष्ठ नेता Smriti Irani ने राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी चर्चा बटोरी थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केएल शर्मा के हाथों मिली हार ने अमेठी में भाजपा की स्थिति को झटका दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ-साथ स्मृति ईरानी के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। पार्टी के सामने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की चुनौती है।
स्मृति ईरानी के दौरे में दिखी संगठनात्मक बेचैनी
राहुल गांधी के दौरे के कुछ दिनों बाद स्मृति ईरानी भी अमेठी पहुंची थीं। उन्होंने दिवंगत भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लिया। हालांकि स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और संगठन की सक्रियता को लेकर नाराजगी सामने आई।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय स्तर पर संगठन को और सक्रिय करने पर जोर दिया है, ताकि आगामी चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।
भाजपा की सड़क पर घटती सक्रियता पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि पिछले कुछ आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों में भाजपा कार्यकर्ताओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। जबकि इससे पहले पार्टी के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुटते रहे हैं।
कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई कार्यक्रमों की जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाई, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे संगठनात्मक चुनौतियों के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
जिले की चार विधानसभा सीटों पर नजर
अमेठी जिले की चार विधानसभा सीटों का प्रदर्शन 2027 के चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में जिले की कुछ सीटों पर भाजपा का प्रतिनिधित्व है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं।
2027 में होगी प्रतिष्ठा की लड़ाई
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेठी में आगामी विधानसभा चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और जनाधार की परीक्षा भी होगा। एक ओर कांग्रेस अपने पारंपरिक गढ़ को पूरी तरह पुनर्जीवित करने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक पकड़ को बनाए रखने के लिए रणनीति तैयार कर रही है।
आने वाले महीनों में अमेठी की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल इस जिले को 2027 के चुनावी रण का महत्वपूर्ण केंद्र मानकर अपनी तैयारियां तेज कर चुके हैं।
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