‘प्रकृति के बीच पर्यटक नहीं, जिज्ञासु विद्यार्थी बनकर जाएं’, प्रदेशवासियों के नाम सीएम योगी की पाती

जैव विविधता संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का किया आह्वान, प्रकृति के प्रति जागरूकता को बताया सबसे बड़ा संरक्षण अभियान

CM Yogi Ki Pati: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को पत्र लिखकर प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और जनभागीदारी का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से प्रकृति को जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह समझने और अनुभव साझा करने का आग्रह किया।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी अपनी विशेष ‘योगी की पाती’ में प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में प्रकृति से विमुख होना उचित नहीं है। जब भी प्रकृति के बीच जाने का अवसर मिले, तो केवल पर्यटक बनकर नहीं बल्कि जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह वहां के वातावरण, जीव-जंतुओं और प्राकृतिक संसाधनों को समझने का प्रयास करें।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति के प्रत्येक जीव और तत्व को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण का अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा।

उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि प्राकृतिक स्थलों की यात्राओं के दौरान अपने अनुभवों को व्लॉग, लेख और अन्य माध्यमों से साझा करें। इससे पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति अपनापन और जागरूकता ही जैव विविधता के सबसे बड़े संरक्षक हैं। यदि समाज प्रकृति को केवल संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार माने, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।

उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन और सहअस्तित्व की भावना ही सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

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