“पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों को लेकर TMC सुप्रीम कोर्ट पहुंची। पार्टी का दावा है कि 31 सीटों पर जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए वोटरों की संख्या से कम था। सुप्रीम Court ने नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी।“
नई दिल्ली। Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया है। पार्टी का कहना है कि राज्य की कम से कम 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन वोटरों की संख्या से कम था, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि ममता बनर्जी और अन्य प्रभावित पक्ष इस संबंध में नया आवेदन दाखिल कर सकते हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Justice Suryakant और न्यायमूर्ति Justice Joymalya Bagchi की बेंच ने की।
TMC का आरोप- वोट हटाने से बदले चुनाव परिणाम
टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Kalyan Banerjee ने अदालत में कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ा।
उन्होंने कहा कि कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम था, जबकि हटाए गए मतदाताओं की संख्या हजारों में थी। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके एक मुवक्किल केवल 862 वोटों से चुनाव हारे, जबकि संबंधित क्षेत्र में 5000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे।
टीएमसी ने अदालत को यह भी बताया कि राज्यभर में पार्टी और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख रहा, जबकि नाम हटाने के खिलाफ अब भी 35 अपीलें लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रभावित पक्षों के पास ठोस तथ्य और दस्तावेज हैं, तो वे इस मुद्दे पर अलग से आवेदन दाखिल कर सकते हैं। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए याचिकाकर्ताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
वहीं Election Commission of India की ओर से अदालत में कहा गया कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का सही तरीका चुनाव याचिका दायर करना है।
‘अपील निपटाने में लग सकते हैं चार साल’
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता Menaka Guruswamy ने अदालत को बताया कि मौजूदा गति से अगर अपीलों की सुनवाई हुई, तो अपीलीय ट्रिब्यूनल को सभी मामलों का निपटारा करने में लगभग चार साल लग सकते हैं।
इस टिप्पणी के बाद अदालत ने संकेत दिए कि मामले की प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता हो सकती है।
बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ा सियासी तापमान
टीएमसी के इस दावे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी लगातार आरोप लगा रही है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और इसका लाभ विपक्ष को मिला। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक हार का बहाना बता रही है।
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