“NEET UG 2026 परीक्षा में संभावित पेपर लीक और गेस पेपर मामले में राजस्थान SOG और ATS की जांच तेज हो गई है। सीकर में वायरल गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल असली परीक्षा से मेल खाने पर अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।“
जयपुर/सीकर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान के सीकर में परीक्षा से पहले वायरल हुए कथित “गेस पेपर” के 100 से अधिक सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। मामले की जांच राजस्थान एसओजी और राजस्थान एटीएस संयुक्त रूप से कर रही हैं। अब तक इस मामले में 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार 3 मई को आयोजित NEET UG परीक्षा से एक दिन पहले 2 मई की रात कुछ छात्रों तक एक कथित गेस पेपर पहुंचा था। यह सामग्री व्हाट्सएप ग्रुप्स और फोटोकॉपी दुकानों के जरिए छात्रों के बीच फैल गई। बाद में जब परीक्षा हुई तो गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 125 बताई गई है।
राजस्थान एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने पुष्टि की कि गेस पेपर व्हाट्सएप और फोटोकॉपी दुकानों तक पहुंचा था तथा इसकी जांच जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार शुरुआत में यह गेस पेपर कथित तौर पर 2 से 5 लाख रुपये में बेचा गया, जबकि परीक्षा से ठीक पहले इसे 30 हजार रुपये तक में छात्रों को उपलब्ध कराया गया।
जांच में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कथित सैंपल पेपर केरल से राजस्थान पहुंचा था। बताया जा रहा है कि 1 मई को राकेश मंडारिया नामक काउंसलर को केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे चुरू के एक छात्र ने यह गेस पेपर भेजा था। छात्र ने दावा किया था कि दक्षिण भारत में यह सामग्री पहले से बेची जा रही थी। इसके बाद यह पेपर कोचिंग संस्थानों, फोटोकॉपी दुकानों और छात्रों तक पहुंच गया।
सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा समानता बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सवालों में पाई गई। करीब 400 प्रश्नों के एक सेट में से 125 सवाल परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों जैसे थे। यही कारण है कि मामला अब केवल “गेस पेपर” तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि संभावित पेपर लीक और संगठित रैकेट की दिशा में जांच की जा रही है।
परीक्षा के दिन ही कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों के पास पहले से ऐसे प्रश्न मौजूद थे, जो परीक्षा में आए। हालांकि शुरुआती स्तर पर स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में 7 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भी कथित अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं, जिसके बाद 8 मई को एजेंसी ने मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेज दिया।
हालांकि NTA ने आधिकारिक तौर पर पेपर लीक से इनकार किया है। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित हुई थी। प्रश्नपत्र जीपीएस ट्रैकिंग वाले वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे, उन पर यूनिक वॉटरमार्क लगाए गए थे, जबकि परीक्षा केंद्रों की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली से की गई थी। केंद्रों पर 5G जैमर भी सक्रिय थे।
मामले की जांच के दौरान एसओजी ने सीकर के कई हॉस्टलों में छापेमारी कर छात्रों और संदिग्ध युवकों से पूछताछ की। मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
अब तक इस मामले में झुंझुनूं से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं एक अन्य आरोपी राजेश को देहरादून के डालनवाला क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 हो गई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह मामला केवल गेस पेपर तक सीमित था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा संगठित पेपर लीक नेटवर्क सक्रिय था।
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