पश्चिम एशिया संकट: ट्रंप का दावा- फिलहाल नहीं होगा हमला, ईरान परमाणु समझौता अंतिम चरण में

इस्राइल-ईरान के बीच तनाव बरकरार, लेकिन युद्धविराम के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज; ट्रंप ने जल्द बड़े फैसले का संकेत दिया

West Asia Crisis के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान और इस्राइल ने फिलहाल हमले रोकने पर सहमति जताई है। परमाणु समझौते पर बातचीत अंतिम दौर में है और अगले कुछ दिनों में बड़ा फैसला हो सकता है।

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में कई दिनों तक चले सैन्य तनाव के बाद फिलहाल ईरान और इस्राइल के बीच युद्धविराम लागू है। हालांकि दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है, लेकिन इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों पक्षों ने कुछ समय तक एक-दूसरे पर हमला नहीं करने पर सहमति जताई है।

न्यूयॉर्क में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता के बाद ईरान और इस्राइल ने तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि कम से कम अगले कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच किसी बड़े सैन्य हमले की संभावना नहीं है।

परमाणु समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में

ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार अगले दो से तीन दिनों में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े प्रतिबंध और समुद्री निगरानी व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक तेहरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हो जाता। उन्होंने संकेत दिया कि समझौते के बाद समुद्री मार्गों को सामान्य रूप से खोल दिया जाएगा।

ईरान के दूतावास की पोस्ट से बढ़ा विवाद

इस बीच ट्यूनीशिया स्थित ईरान का दूतावास की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। दूतावास की ओर से साझा की गई एक तस्वीर में ट्रंप मुस्कुराते हुए दिखाई दिए, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू को दीवार पर टेप से बंधे हुए दर्शाया गया।

तस्वीर के साथ लिखे संदेश—“If you want to deal with Iran…”—को लेकर सोशल मीडिया और कूटनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। इसे कई विश्लेषक राजनीतिक संदेश और मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

युद्धविराम के बावजूद बनी हुई है सतर्कता

सोमवार को ईरान की सेना ने इस्राइल पर हमले रोकने की घोषणा की थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ। हालांकि दोनों देशों की सेनाएं अभी भी उच्च सतर्कता पर हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परमाणु समझौते पर सहमति बनती है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। वहीं बातचीत विफल होने की स्थिति में क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

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