“दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक पर यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने निशाना साधा है। उन्होंने गठबंधन को बेमेल बताते हुए नेताओं को ‘दगे हुए कारतूस’ करार दिया और विपक्ष की राष्ट्रीय स्वीकार्यता पर सवाल उठाए।“
लखनऊ। दिल्ली में आयोजित INDI गठबंधन की बैठक को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने INDI गठबंधन को “बेमेल गठबंधन” बताते हुए इसके नेताओं को “दगे हुए कारतूस” करार दिया।
राजभर ने कहा कि विपक्षी दलों की यह एकजुटता केवल दिखावटी है और गठबंधन में शामिल अधिकांश दल अपने-अपने राज्यों तक ही सीमित प्रभाव रखते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक राज्य का नेता दूसरे राज्य में कितना राजनीतिक असर रखता है।
ममता और अखिलेश का उदाहरण देकर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत में राजभर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अखिलेश यादव कितने वोट दिला सकते हैं और उत्तर प्रदेश में ममता बनर्जी का कितना प्रभाव है। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल अधिकांश दलों की राजनीतिक ताकत क्षेत्रीय सीमाओं तक ही सिमटी हुई है।
उनके अनुसार, INDI गठबंधन में ऐसा कोई नेता दिखाई नहीं देता जिसे पूरे देश में व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त हो और जो विभिन्न राज्यों में जाकर चुनावी माहौल बदल सके।
मायावती और बसपा का किया जिक्र
राजभर ने कहा कि विपक्षी राजनीति में यदि कोई दल राष्ट्रीय स्तर पर अपने दम पर वोट हासिल करने की क्षमता रखता है, तो वह मायावती और बहुजन समाज पार्टी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बसपा INDI गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
राजभर ने कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन राज्यों में कभी पार्टी मजबूत हुआ करती थी, वहां उसका जनाधार लगातार कमजोर हुआ है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कांग्रेस कई राज्यों में अपनी पुरानी राजनीतिक ताकत खो चुकी है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि INDI गठबंधन के नाम पर ऐसे दल और नेता एक मंच पर आ रहे हैं जो चुनावी स्तर पर अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं।
विपक्ष की बैठक पर सियासी बयानबाजी तेज
दिल्ली में हुई INDI गठबंधन की बैठक को विपक्ष 2027 और उससे आगे के चुनावी संघर्ष की रणनीति से जोड़कर देख रहा है। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल इस बैठक को लेकर लगातार हमलावर हैं। राजभर का यह बयान भी उसी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष की एकजुटता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर और तेज हो सकता है।
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