“US Iran Conflict 2026: होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों तथा तटीय रडार चौकियों पर हवाई हमले किए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे मध्य पूर्व में युद्धविराम पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।“
वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए उसके ड्रोन और मिसाइल भंडारण स्थलों के साथ-साथ तटीय रडार चौकियों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर हुए हमले के जवाब में की गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी बलों द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को निशाना बनाना और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करना अस्वीकार्य है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी ड्रोन हमले ने हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद की वजह
अमेरिका के अनुसार, सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर ड्रोन हमला उस समय किया गया जब वह ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों तथा तटीय रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इन हमलों के स्थान और नुकसान का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के ताहेरूयेह घाट क्षेत्र में भी जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
युद्धविराम पर गहराया संकट
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने के लिए युद्धविराम की दिशा में प्रयास किए गए थे। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इन प्रयासों को गंभीर झटका पहुंचाया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला युद्धविराम की भावना के खिलाफ है, जबकि ईरान का दावा है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री नियंत्रण के अपने अधिकारों की रक्षा कर रहा है।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं, ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिखाई दे सकता है।
क्या कहता है भू-राजनीतिक समीकरण?
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति इस संकट की दिशा तय करेगी।
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