“Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case 2026: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपितों को अयोध्या कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। आरोपितों से लगभग 80 लाख रुपये नकद, 1000 अमेरिकी डॉलर और विदेशी मुद्रा बरामद हुई है। वहीं, ट्रस्ट ने चंपतराय और अनिल मिश्र के इस्तीफे की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।“
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपितों को शनिवार को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपितों के कब्जे से लगभग 79 लाख 85 हजार 493 रुपये नकद, 1000 अमेरिकी डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राएं बरामद की गई हैं।
दीवानी न्यायालय की रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह ने सभी आरोपितों को 29 जून तक न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार अयोध्या भेजने का आदेश दिया। इस संवेदनशील मामले की जांच अब पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है और आगे की कार्रवाई एंटी करप्शन कोर्ट में होगी।
चंपतराय और अनिल मिश्र के इस्तीफे की खबरों का खंडन
चढ़ावा चोरी मामले के बीच दिनभर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया और कुछ टीवी चैनलों पर चर्चा का विषय बनी रहीं।
हालांकि ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव ने स्पष्ट किया कि दोनों पदाधिकारियों ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
पुलिस ने इस मामले में मंदिर व्यवस्था और चढ़ावे की गणना से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
सपा के आरोपों के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की चोरी का आरोप लगाया था। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया था।
मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे और 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारियां की गईं।
जांच का दायरा बढ़ेगा
पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच करेगी जिन्होंने आरोपितों को चढ़ावे की गणना से जुड़े कार्यों में नियुक्त कराने में मदद की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गणनाकर्मियों की नियुक्ति किसकी सिफारिश पर हुई और इसमें बैंक अधिकारियों या अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
सूत्रों के अनुसार चढ़ावे की गिनती के कार्य में करीब 40 लोग जुड़े हुए थे और अब सभी के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
चांदी की ईंटें और कागभुशुंडि सुरक्षित
मामले के बीच सोशल मीडिया पर मंदिर को दान में मिली चांदी की ईंटों और कागभुशुंडि प्रतिमा के गायब होने की भी चर्चाएं हुईं। हालांकि ट्रस्ट और संबंधित पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
बताया गया कि दान में मिली चांदी की ईंटों को सुरक्षा कारणों से सिल्वर बार में परिवर्तित कर बैंक लॉकर में रखा गया है, जबकि चांदी का कागभुशुंडि मंदिर परिसर में सुरक्षित है और उसकी नियमित पूजा की जा रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला
राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल माना जाता है। ऐसे में चढ़ावा चोरी मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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