राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर स्वामी अवधेशानंद गिरी सख्त, बोले- ‘यह चूक नहीं, सनातन समाज की आस्था के साथ बड़ा छल’

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी विवाद पर जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मामले को केवल आर्थिक अनियमितता या चोरी का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि भगवान राम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने जिस विश्वास के साथ दान दिया, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वालों की लापरवाही बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि “बड़ा पाप” है और दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए।

केवल दोषियों की पहचान पर्याप्त नहीं

अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट ‘अनम्यूट भारत’ में बातचीत के दौरान स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि सिर्फ चोरी करने वालों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास निगरानी, नियंत्रण और प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई है तो उसे स्वीकार करना होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी।

अयोध्या सनातन संस्कृति का सर्वोच्च प्रतीक

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि अयोध्या केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और सनातन चेतना का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में पारदर्शिता पर सवाल उठना पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि अब ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें वित्तीय प्रबंधन से लेकर सुरक्षा और निगरानी तक हर स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय हो।

केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार को पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने एक पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र बनाने की बात कही, जिसमें दान की राशि, प्रबंधन व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पूरी तरह स्पष्ट हो।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाएगा।

‘भक्ति प्रदर्शन नहीं, आचरण से सिद्ध होती है’

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ और दिखावे की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर धार्मिक प्रदर्शन करना भक्ति नहीं है। वास्तविक धर्म आचरण, अनुशासन और जिम्मेदारी से साबित होता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनाए रखें, स्वच्छता का ध्यान रखें और पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक जिम्मेदारी समझें।

उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना, वृक्ष और प्रकृति की पूजा तभी सार्थक है, जब उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया जाए।

युवाओं को दिया संदेश- सकारात्मक नहीं, यथार्थवादी बनें

युवाओं की मानसिक चुनौतियों पर बात करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि आज की पीढ़ी में तुरंत सफलता पाने की इच्छा बढ़ रही है। सोशल मीडिया के कारण स्वतंत्र चिंतन कमजोर हो रहा है।

उन्होंने युवाओं को योग, पर्याप्त नींद, प्राकृतिक आहार और अच्छे साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल सकारात्मक सोच नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को समझने वाली सोच ही स्थायी सफलता दिला सकती है।

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