“राम मंदिर चंदा विवाद में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को वाराणसी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने लीगल नोटिस भेजा है। वकील ने ₹1.11 लाख लौटाने की पेशकश की है और कहा है कि नोटिस स्वीकार नहीं करने पर राशि कोर्ट में जमा कराई जाएगी।“
वाराणसी। राम मंदिर चंदा विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को वाराणसी के अधिवक्ता ने लीगल नोटिस भेजा है। यह नोटिस उनके उस बयान के बाद भेजा गया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे की राशि वापस लेने की बात कही थी।
वाराणसी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने दावा किया कि यदि दिग्विजय सिंह अपने दान किए गए 1.11 लाख रुपये वापस चाहते हैं, तो वह एक रामभक्त के रूप में यह राशि स्वयं लौटाने को तैयार हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने लिखित रिसीविंग देने की शर्त रखी है।
15 दिन का दिया गया लीगल नोटिस
अधिवक्ता ने बताया कि दिग्विजय सिंह को 15 दिनों का लीगल नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि वह राशि स्वीकार नहीं करते हैं, तो यह रकम संबंधित अदालत में जमा करा दी जाएगी।
उनका कहना है कि दान धार्मिक आस्था के तहत दिया जाता है और उसका एक कानूनी स्वरूप होता है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से दान वापस मांगने का बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
‘रामभक्त के रूप में पैसा लौटाने को तैयार’
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि भगवान के भक्त होने के नाते वह दिग्विजय सिंह को दान की पूरी राशि लौटाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि केवल इसकी लिखित रिसीविंग दी जाए, ताकि आगे कोई विवाद न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि नोटिस का जवाब नहीं दिया गया या राशि लेने से इनकार किया गया, तो पैसा अदालत में जमा कराया जाएगा।
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद दिग्विजय सिंह के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि राम मंदिर निर्माण के दौरान उन्होंने 1.11 लाख रुपये का दान दिया था और अब उसे वापस चाहते हैं।
इसी बयान को आधार बनाकर अधिवक्ता ने लीगल नोटिस जारी किया है। उनका आरोप है कि इस तरह का बयान धार्मिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है।
मामला फिर चर्चा में
राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे को लेकर हाल के दिनों में कई बयान और प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में दिग्विजय सिंह को भेजे गए इस लीगल नोटिस ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया है। फिलहाल इस मामले में दिग्विजय सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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