“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए तीन अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट शामिल हैं।“
नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और न्यूजीलैंड ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच ऑकलैंड में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।
इन समझौतों के जरिए दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफिक सहयोग और आपसी लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने का फैसला किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को और मजबूती देगा।
समुद्री सुरक्षा सहयोग को मिलेगा नया ढांचा
भारत के रक्षा मंत्रालय और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच हुए समुद्री सहयोग समझौते के तहत दोनों देश समुद्री गतिविधियों की निगरानी, सूचनाओं के आदान-प्रदान, बातचीत और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा देंगे।
इस समझौते का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों में साझा विश्वास भारत और न्यूजीलैंड को स्वाभाविक साझेदार बनाता है। उन्होंने कहा कि दोनों समुद्री देशों के बीच मजबूत सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को नई ऊर्जा देगा।
हाइड्रोग्राफी और समुद्री मानचित्रण में बढ़ेगा सहयोग
दूसरे समझौते के तहत दोनों देश हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे।
इसके अंतर्गत:
- समुद्री नक्शों का संयुक्त निर्माण,
- हाइड्रोग्राफिक डेटा साझा करना,
- तकनीकी प्रशिक्षण,
- क्षमता निर्माण और समुद्री सर्वेक्षण
जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाइड्रोग्राफिक सहयोग केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक महत्व भी है। इससे नौसेना अभियानों, सुरक्षित समुद्री यातायात, आपदा प्रबंधन और समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।
नौसेना के लिए लॉजिस्टिक्स सपोर्ट आसान होगा
तीसरे समझौते के तहत भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे दोनों देशों की सेनाओं को जरूरत के समय:
- ईंधन भरने,
- मरम्मत और रखरखाव,
- चिकित्सा सहायता,
- आपूर्ति और बंदरगाह सुविधाओं
जैसी सेवाओं में सहयोग मिलेगा।
हालांकि यह किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन इससे दोनों देशों की समुद्री संचालन क्षमता और आपसी तालमेल मजबूत होगा।
दक्षिण प्रशांत में भारत की बढ़ेगी भूमिका
परंपरागत रूप से भारत का समुद्री फोकस हिंद महासागर क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत तक सीमित रहा है। न्यूजीलैंड के साथ नए समझौते भारत को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और कूटनीतिक मौजूदगी बढ़ाने में मदद करेंगे।
यह क्षेत्र वर्तमान समय में वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन रहा है। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत और न्यूजीलैंड का सहयोग क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समुद्री सुरक्षा में साझा चुनौतियों से निपटने की तैयारी
दोनों देशों के बीच सहयोग से समुद्री क्षेत्र में कई चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इनमें:
- अवैध मछली पकड़ना,
- समुद्री डकैती,
- तस्करी,
- समुद्री आतंकवाद,
- संदिग्ध जहाजों की गतिविधियां,
- मानवीय सहायता अभियान
शामिल हैं।
समुद्री जानकारी साझा करने की व्यवस्था दोनों देशों को संभावित खतरों की बेहतर निगरानी में मदद करेगी।
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में न्यूजीलैंड की भागीदारी
भारत ने न्यूजीलैंड के इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के समुद्री सुरक्षा स्तंभ में शामिल होने का स्वागत किया है।
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित संवाद के लिए वार्षिक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने पर भी सहमति जताई है।
भारत की ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पिछले कुछ वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में खुद को एक जिम्मेदार समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।
एंटी-पायरेसी अभियान, मानवीय सहायता मिशन, आपदा राहत और समुद्री क्षमता निर्माण के जरिए भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई है।
न्यूजीलैंड के साथ हुए ये समझौते भारत की इसी रणनीति को हिंद-प्रशांत के व्यापक क्षेत्र तक विस्तार देते हैं।
तीन समझौतों से बनेगी दीर्घकालिक समुद्री साझेदारी
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ये तीनों समझौते अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक व्यापक समुद्री साझेदारी का ढांचा तैयार करते हैं।
इनसे:
- समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी,
- नौसैनिक सहयोग बढ़ेगा,
- क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा,
- हिंद-प्रशांत में नियम आधारित व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
भारत के लिए यह समझौता एक बड़ी समुद्री शक्ति और विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। वहीं न्यूजीलैंड के लिए यह क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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