रामपुर में आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर संकट, कई विभागों की कार्रवाई से बढ़ी मुश्किलें

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन का शिकंजा बढ़ गया है। RDA ने 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। अब अग्निशमन विभाग और PWD की कार्रवाई से आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट पर संकट गहराया।

रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासनिक कार्रवाई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद अब रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA), अग्निशमन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) की सक्रियता ने यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यूनिवर्सिटी प्रबंधन प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अदालत का रुख करेगा या फिर तय समय के बाद होने वाली कार्रवाई का सामना करेगा। फिलहाल प्रशासन और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

2017 के बाद से विवादों में घिरी जौहर यूनिवर्सिटी

मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का विवाद वर्ष 2017 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार बढ़ता गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पर कई जांच और कार्रवाई शुरू हुईं।

सबसे पहले आयकर विभाग ने ट्रस्ट की गतिविधियों में अनियमितताओं का हवाला देते हुए उसका 12AB रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इसे ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका माना गया।

इसके बाद रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने भवनों की जांच शुरू की।

RDA की जांच में 40 में से 38 भवनों पर उठे सवाल

रामपुर विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने कुल 40 भवनों में से सिर्फ दो भवनों के नक्शे स्वीकृत थे, जबकि बाकी 38 भवन बिना स्वीकृत मानचित्र के बनाए गए थे।

RDA ने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जवाब मांगा। प्रबंधन ने अपना पक्ष भी रखा और अधिकारियों के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ, लेकिन प्राधिकरण के अनुसार जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

इसके बाद RDA सचिव और जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया।

15 दिन का समय, नहीं हटाए तो प्रशासन करेगा कार्रवाई

RDA ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया है कि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा ले। यदि तय अवधि में ऐसा नहीं किया जाता है तो रामपुर विकास प्राधिकरण नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस आदेश को अदालत में चुनौती देता है या प्रशासन की कार्रवाई को स्वीकार करता है।

अग्निशमन विभाग ने भी जारी किया नोटिस

RDA की कार्रवाई के बीच अग्निशमन विभाग ने भी जौहर यूनिवर्सिटी परिसर का निरीक्षण किया।

निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा से जुड़े कई मानकों के पूरी तरह पालन नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद विभाग ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया। नोटिस की समय सीमा भी अब पूरी हो चुकी है।

इससे यूनिवर्सिटी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

PWD ने मुख्य गेट पर लगाया बोर्ड, सड़क को बताया सार्वजनिक रास्ता

अब इस मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) की भी एंट्री हो गई है। समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान यूनिवर्सिटी तक पहुंचने के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया था, जिसकी लागत करीब 13.5 करोड़ रुपये बताई जाती है।

यह मामला फिलहाल हाई कोर्ट में विचाराधीन है और इस पर स्थगन आदेश भी लागू है।

इसी बीच PWD ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर इस मार्ग को आम रास्ता बताया है। विभाग अब इस सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित कराने और मुख्य गेट हटाने के लिए न्यायालय का रुख करने की तैयारी में है।

डीएम बोले- नियमों की जानकारी थी, फिर भी नहीं कराया गया नक्शा पास

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि पहले यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन था। वर्ष 2024 में इसे विकास प्राधिकरण के अधीन कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी, इसी कारण उन्होंने दो भवनों के नक्शे स्वीकृत कराए। लेकिन 38 भवनों का नक्शा पास नहीं कराया गया।

डीएम के अनुसार, इससे स्पष्ट है कि नियमों की जानकारी होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया।

छात्रों के भविष्य को लेकर प्रशासन ने शुरू की तैयारी

संभावित कार्रवाई के बीच प्रशासन ने छात्रों के भविष्य को लेकर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर छात्र-छात्राओं के लिए विशेष परामर्श केंद्र बनाया गया है। यहां विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, भविष्य और आगे की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर जानकारी ली जा रही है।

विशेषज्ञ और शिक्षक छात्रों को यह सलाह दे रहे हैं कि यदि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई प्रभावित होती है तो वे किन अन्य विश्वविद्यालयों या शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं।

छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल

जिला प्रशासन की इस पहल को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करना चाहता है।

गवर्नमेंट रजा पीजी कॉलेज के प्रोफेसर अरशदरी ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से यह कैंप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी पर संकट आता है तो छात्रों को आगे कहां और किस संस्थान में पढ़ाई जारी रखनी है, इसी को लेकर परामर्श दिया जा रहा है।

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी का भविष्य अब प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी लड़ाई और आने वाले फैसलों पर निर्भर करता है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि आजम खान के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का अस्तित्व बरकरार रहेगा या फिर प्रशासनिक कार्रवाई इसकी दिशा बदल देगी।

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