“Vrindavan Yamuna River Front Case: सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के वृंदावन में 177 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे यमुना रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।“
मथुरा/वृंदावन: उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर वृंदावन में यमुना नदी पर चल रहे रिवर फ्रंट निर्माण कार्य को सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है। अदालत ने यमुना नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह को प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यह आदेश दिया है।
मंगलवार को ब्रज वृंदावन देवालय समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने परियोजना पर अंतरिम रोक लगाई। साथ ही केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से पूरे मामले पर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
177 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा था रिवर फ्रंट
वृंदावन यमुना रिवर फ्रंट परियोजना करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है। इस योजना के तहत यमुना किनारे आठ घाटों का विकास, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के बैठने की सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
परियोजना में बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र के आसपास के घाट भी शामिल हैं। इसके अलावा यमुना में गिरने वाले नालों की टेपिंग का काम भी किया गया है, जिससे प्रदूषित पानी को नदी में जाने से रोका जा सके।
यमुना के प्रवाह को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ब्रज वृंदावन देवालय समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि रिवर फ्रंट का निर्माण यमुना नदी के काफी अंदर तक किया जा रहा है।
समिति का कहना है कि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आ सकता है और पानी का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो सकता है। याचिका में वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई।
10 साल तक रुका रहा था प्रोजेक्ट
वृंदावन रिवर फ्रंट परियोजना पहले भी विवादों में रही है। करीब दस वर्ष पहले इसकी शुरुआत के बाद आपत्तियां सामने आई थीं, जिसके कारण मामला अदालत तक पहुंचा और लंबे समय तक काम बंद रहा।
इस वर्ष अप्रैल में हाई कोर्ट के आदेश के बाद परियोजना का काम दोबारा शुरू किया गया था। वर्तमान में घाटों पर प्लेटफॉर्म निर्माण और लाल पत्थर लगाने जैसे कार्य चल रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी केंद्र और यूपी सरकार से रिपोर्ट
याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी है।
अदालत यह देखना चाहती है कि निर्माण कार्य से पर्यावरण, नदी के प्राकृतिक प्रवाह और यमुना के स्वरूप पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
धार्मिक पर्यटन बढ़ाने की थी योजना
वृंदावन देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। रिवर फ्रंट परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था।
हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परियोजना का भविष्य सरकार की रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।
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