“इलाहाबाद हाईकोर्ट ने APO भर्ती-2025 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर UPPSC से सभी वर्गों के कटऑफ अंक सीलबंद लिफाफे में मांगे हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या कोई OBC अभ्यर्थी जनरल कैटेगरी के कटऑफ से अधिक अंक पाने के बावजूद अपनी श्रेणी में रखा गया है।“=
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2025 की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह प्रारंभिक परीक्षा की सभी श्रेणियों की कटऑफ अंक सूची सीलबंद कवर में पेश करे।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आयोग से यह भी जानकारी मांगी है कि क्या OBC वर्ग का कोई ऐसा अभ्यर्थी है, जिसने सामान्य (General) श्रेणी के कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हों, लेकिन उसे जनरल श्रेणी में स्थान नहीं दिया गया।
इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैंडिडेट्स को लेकर विवाद
यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने पंकज वर्मा और दो अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा।
याचियों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी (ओपन कैटेगरी) में शामिल नहीं किया गया। इससे आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ, जिन्होंने सामान्य वर्ग की मेरिट से अधिक अंक प्राप्त किए थे।
आयोग ने क्या कहा?
पिछली सुनवाई में UPPSC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया था कि APO प्रारंभिक परीक्षा में OBC वर्ग की कटऑफ सामान्य वर्ग की कटऑफ से कम है। इसी आधार पर उन्होंने याचिका खारिज करने की मांग की थी।
इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि कई ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने सामान्य वर्ग की कटऑफ से ज्यादा अंक हासिल किए हैं, लेकिन उन्हें सामान्य वर्ग में स्थान नहीं दिया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि ऐसे अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में माइग्रेट किया जाए तो याचिकाकर्ताओं का चयन अपनी आरक्षित श्रेणी में हो सकता है।
UPPSC ने 30 अप्रैल को जारी किया था परिणाम
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 30 अप्रैल को जारी किया था।
याचिकाकर्ताओं ने आयोग के 9 जनवरी 2020 के ऑफिस मेमोरेंडम और प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी (MRC) अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के आधार पर सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए था।
आरक्षण नियमों को लेकर उठाए गए सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि आयोग की व्यवस्था उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम-1994 की धारा 3(6) और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के विपरीत है।
याचियों ने कहा है कि आरक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में स्थान दिया जाना चाहिए और आरक्षण का लाभ चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में दिया जाना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराने और मेंस स्थगित करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को रद्द कर नए सिरे से मेरिट तैयार करने का आदेश दिया जाए।
इसके अलावा उन्होंने मुख्य परीक्षा (Mains) को भी स्थगित करने की मांग की है, ताकि आरक्षण नियमों के विवाद का समाधान होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
हाईकोर्ट के अगले आदेश पर अब सभी अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं।
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