“Lucknow Fire Tragedy में 15 लोगों की मौत के बाद एलडीए ने अलीगंज स्थित अवैध चार मंजिला व्यावसायिक इमारत को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों, तीन बुलडोजर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई जारी है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।“
लखनऊ। Lucknow Fire Tragedy में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के करीब एक महीने बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अलीगंज स्थित अवैध चार मंजिला व्यावसायिक भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। शनिवार सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन बुलडोजरों की मदद से इमारत गिराने का अभियान शुरू किया गया। पूरे इलाके की घेराबंदी कर 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
एलडीए के विहित न्यायालय ने 10 जुलाई को भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल को अवैध निर्माण स्वयं हटाने का आदेश दिया था। इसके लिए 25 जुलाई तक का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में भवन नहीं हटाए जाने पर एलडीए के प्रवर्तन दस्ते ने शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
ऊपरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए बनाया गया रैंप
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सबसे पहले मलबे का रैंप तैयार किया गया, जिससे बुलडोजर और अन्य मशीनें भवन की ऊपरी मंजिल तक पहुंच सकें। इसके बाद इमारत के ऊपरी हिस्से को तोड़ने का काम शुरू किया गया। पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है और आसपास के रास्तों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
22 जून को लगी थी भीषण आग
अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एमएस-102 भूखंड पर बने इस अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में 22 जून को भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि 9 अन्य लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौके पर पहुंचे थे और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन करते हुए सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी।
जांच और कार्रवाई पर अब भी उठ रहे सवाल
हादसे के बाद पांच अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया गया, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है। मामले के मुख्य भवन स्वामी की गिरफ्तारी भी नहीं हो पाई है। पुलिस ने आरोपी पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी है। घटना के एक महीने बाद भी कई बड़े सवालों के जवाब बाकी हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर बहस जारी है।
अलीगंज के लोगों का कहना है कि भले ही हादसे वाली इमारत अब मिट जाएगी, लेकिन 15 परिवारों का दर्द और इस दुर्घटना की यादें लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहेंगी।
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