“रामपुर के डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने जौहर विश्वविद्यालय के छात्रों से मुलाकात कर ध्वस्तीकरण आदेश के कानूनी पहलुओं को समझाया। छात्रों ने ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की मांग की, जिस पर डीएम ने अपील की प्रक्रिया की जानकारी दी।“
रामपुर। मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के बाद जारी विवाद के बीच रविवार को रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय के विधि (एलएलबी) के छात्रों से मुलाकात कर पूरे मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। अवकाश के दिन भी जिलाधिकारी कार्यालय खोलकर हुई इस बैठक में छात्रों ने ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा, जबकि डीएम ने उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और अपील के अधिकार की जानकारी दी।
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद जारी है छात्रों का धरना
15 जुलाई को जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना देकर आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त, मुरादाबाद के समक्ष अपील दायर कर रखी है।
प्रशासन ने वार्ता के लिए छात्रों को बुलाया
धरना लगातार जारी रहने के बीच प्रशासन ने संवाद का रास्ता अपनाया। शनिवार को एसडीएम टांडा कुमार गौरव और सीओ टांडा पंकज पंत को विश्वविद्यालय भेजकर छात्रों से बातचीत कराई गई। इसके बाद छात्रों को रविवार को जिलाधिकारी कार्यालय बुलाया गया ताकि वे अपनी बात रख सकें और कानूनी स्थिति को समझ सकें।
दो घंटे तक चली चर्चा, छात्रों ने सौंपा ज्ञापन
रविवार को जिलाधिकारी कार्यालय में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सतनाम सिंह मट्टू की मौजूदगी में एलएलबी के छात्र-छात्राओं ने डीएम से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की मांग वाला ज्ञापन सौंपा और अपनी चिंताएं प्रशासन के सामने रखीं।
डीएम बोले- असहमति हो तो अपील का अधिकार उपलब्ध
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने छात्रों को बताया कि यदि किसी प्रशासनिक निर्णय से कोई पक्ष असहमत है तो कानून में अपील का अधिकार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में भी संबंधित पक्ष अपील कर चुका है और अब उसी प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी निर्णय देगा। ऐसे में अंतिम निर्णय न्यायिक और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही होगा।
‘धरना समाधान नहीं, कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखें’
डीएम ने छात्रों से कहा कि जब मामला विधिक प्रक्रिया में विचाराधीन है, तब धरना-प्रदर्शन से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने छात्रों से न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने और कानून के दायरे में अपनी बात रखने की अपील की।
सियासी चर्चा के केंद्र में भी मामला
जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल और नेताओं की इस मामले पर सक्रियता बढ़ी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि विवाद का समाधान पूरी तरह कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
बैठक के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह और सीओ सिटी अभिषेक सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। वार्ता के बाद छात्र शांतिपूर्वक लौट गए और प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी।
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