ग्राम पंचायत गठन में नियमों की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त, विशेष सचिव को तलब कर मांगा स्पष्टीकरण

बहराइच के डिहवा खुर्द गांव को चहलर ग्राम पंचायत में शामिल करने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ सख्त हुई। कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्पष्टीकरण मांगा है।

लखनऊ। बहराइच में ग्राम पंचायत के गठन और गांवों को एक पंचायत में शामिल करने के नियमों की अनदेखी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। डिहवा खुर्द गांव को चहलर ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने के मामले में कोर्ट ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ल की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव को पांच अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अपर मुख्य सचिव अथवा प्रमुख सचिव पंचायती राज विशेष सचिव को राज्य सरकार का पक्ष रखने में मार्गदर्शन दें और उनके हलफनामे का परीक्षण भी करें।

निदेशक पंचायती राज के आदेश पर कोर्ट ने उठाए सवाल

कोर्ट ने महेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याची के प्रत्यावेदन को खारिज करने वाला निदेशक पंचायती राज का आदेश प्रथमदृष्टया तथ्यात्मक और कानूनी आधार से रहित प्रतीत होता है।

पीठ ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि मामले में राज्य सरकार की ओर से समुचित स्तर पर विचार क्यों नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, संबंधित प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों को समग्र रूप से देखने की आवश्यकता थी।

डिहवा खुर्द और चहलर के बीच दो गांवों का मामला

सुनवाई के दौरान बहराइच के जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्रभान सिंह भी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि डिहवा खुर्द और चहलर के बीच माणिकापुर और रसूलाबाद दो गांव स्थित हैं, लेकिन ये दोनों गांव चहलर ग्राम पंचायत का हिस्सा नहीं हैं।

इस तथ्य के सामने आने के बाद ग्राम पंचायत गठन और गांवों को एक पंचायत में शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल और गंभीर हो गए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से नियमों के अनुरूप पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

16 अगस्त 2014 के शासनादेश का दिया हवाला

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान 16 अगस्त 2014 के शासनादेश का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी गांव को किसी ग्राम पंचायत में शामिल करने की प्रक्रिया में संबंधित नियमों का पूरी तरह पालन किया जाना जरूरी है।

पीठ ने कहा कि किसी एक प्रावधान का सहारा लेकर शासनादेश में दिए गए दूसरे प्रावधान की अनदेखी नहीं की जा सकती। सभी संबंधित प्रावधानों को एक साथ पढ़कर और लागू करके ही ग्राम पंचायत गठन अथवा पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

नियमों की समग्र व्याख्या जरूरी

अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायतों के गठन या गांवों को किसी पंचायत में शामिल करने से जुड़े नियमों की व्याख्या करते समय केवल किसी एक प्रावधान को आधार नहीं बनाया जा सकता। पूरी व्यवस्था और सभी लागू शर्तों को साथ लेकर निर्णय किया जाना चाहिए।

कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के गठन से जुड़े मामलों में प्रक्रिया और नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।

विशेष सचिव को देना होगा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण

हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें मामले में विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव पंचायती राज को विशेष सचिव को सरकार का पक्ष रखने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देने और उनके हलफनामे का परीक्षण करने के लिए कहा गया है।

पांच अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस दिन विशेष सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ विभाग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और मामले से जुड़े तथ्यों पर कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायती राज विभाग ग्राम पंचायत गठन से जुड़े नियमों और डिहवा खुर्द को चहलर ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने के मामले में अदालत के समक्ष क्या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।

क्या है पूरा मामला

बहराइच के डिहवा खुर्द गांव को चहलर ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने को लेकर विवाद सामने आया था। मामले में महेंद्र प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट का रुख किया। याची की ओर से संबंधित निर्णय और प्रत्यावेदन के निस्तारण को चुनौती दी गई।

सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायतों के गठन से जुड़े नियमों और 2014 के शासनादेश के प्रावधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि संबंधित आदेश के पीछे पर्याप्त तथ्यात्मक और कानूनी आधार दिखाई नहीं देता। इसी के बाद अदालत ने पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Back to top button