बलिया समेत पूर्वांचल के 7 जिलों में होगा बाढ़ जोखिम सर्वे, 2500 गांवों की तैयार होगी आपदा योजना

उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया समेत पूर्वांचल के सात जिलों में बाढ़ जोखिम सर्वे कराने का फैसला लिया है। HRVCA कार्यक्रम के तहत 2500 गांवों का वैज्ञानिक आकलन होगा और ग्राम आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके लिए ₹1.45 करोड़ जारी किए गए हैं।

बलिया। मानसून के दौरान बाढ़ के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल के बाढ़ प्रभावित जिलों में तैयारियां तेज कर दी हैं। अब बलिया समेत पूर्वांचल के सात जिलों में बाढ़ जोखिम का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। इसके तहत गांवों में संभावित खतरे, संवेदनशील आबादी और राहत-बचाव की व्यवस्थाओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने 44 बाढ़ प्रभावित जिलों के 2500 गांवों में एचआरवीसीए (Hazard, Risk, Vulnerability and Capacity Assessment) कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए शासन की ओर से कुल ₹1.45 करोड़ की धनराशि जारी की गई है।

बाढ़ के खतरे का वैज्ञानिक तरीके से होगा आकलन

एचआरवीसीए कार्यक्रम के तहत बाढ़ प्रभावित गांवों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसमें बाढ़ की संभावना वाले क्षेत्र, जोखिम वाले स्थान, संवेदनशील आबादी, सुरक्षित आश्रय स्थल, निकासी मार्ग, राहत एवं बचाव संसाधनों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध क्षमताओं का मूल्यांकन शामिल है।

सर्वे के आधार पर प्रत्येक गांव के लिए अलग-अलग ग्राम आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी, जिससे बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रशासन और ग्रामीणों को बेहतर तरीके से राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने में मदद मिलेगी।

पूर्वांचल के सात जिलों को मिले 24.50 लाख रुपये

इस योजना के तहत पूर्वांचल के सात जिलों के लिए कुल 24.50 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें:

  • वाराणसी को 6 लाख रुपये
  • बलिया को 5 लाख रुपये
  • गाजीपुर, आजमगढ़ और मिर्जापुर को 3-3 लाख रुपये
  • चंदौली को 2 लाख रुपये
  • जौनपुर को 2.50 लाख रुपये

की धनराशि दी गई है।

यह राशि सर्वे, ग्राम आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने और ग्रामीणों को प्रशिक्षण देने पर खर्च की जाएगी।

बलिया में 379 गांवों पर रहता है बाढ़ का खतरा

बलिया जिले में हर साल गंगा और घाघरा जैसी नदियों के जलस्तर बढ़ने से बड़े क्षेत्र प्रभावित होते हैं। पिछले बाढ़ रिकॉर्ड के अनुसार जब नदियां खतरे के उच्चतम स्तर तक पहुंचती हैं तो जिले के करीब 379 गांवों की लगभग 4.23 लाख आबादी प्रभावित होती है।

बांसडीह, रेवती, बैरिया सहित कई इलाकों में हर वर्ष बाढ़ का असर ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे में एचआरवीसीए कार्यक्रम के तहत तैयार होने वाली योजनाएं स्थानीय प्रशासन को पहले से तैयारी करने में मदद करेंगी।

118 गांवों का पहले हो चुका है सर्वे

बलिया में पिछले वर्ष स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से बाढ़ प्रभावित 118 गांवों का सर्वे किया था। अब इन्हीं गांवों में ग्राम आपदा प्रबंधन योजना को और प्रभावी बनाया जाएगा।

ग्रामीणों को बाढ़ के दौरान सुरक्षित निकासी, आपदा जोखिम कम करने, राहत-बचाव प्रक्रिया और आपात स्थिति में स्वयं की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

आपदा से पहले तैयार होगी गांवों की रणनीति

प्रशासन का उद्देश्य है कि बाढ़ आने के बाद राहत कार्य शुरू करने के बजाय पहले से ही गांव स्तर पर तैयारी पूरी कर ली जाए। इससे प्रभावित लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

एडीएम वित्त एवं राजस्व बलिया अनिल कुमार ने बताया कि एचआरवीसीए कार्यक्रम के तहत बाढ़ प्रभावित गांवों की आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी और ग्रामीणों को आपदा से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा।

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