E20 पेट्रोल के विरोध में ट्रांसपोर्टर्स का बड़ा ऐलान, 4 अगस्त को संसद मार्च करेंगे दिल्ली के वाहन चालक

E20 पेट्रोल के विरोध में दिल्ली के ट्रांसपोर्ट संगठनों ने 4 अगस्त 2026 को संसद मार्च का ऐलान किया है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि सरकार E20 ईंधन को एकमात्र विकल्प के रूप में न थोपे और वाहन चालकों को अन्य ईंधन विकल्प भी उपलब्ध कराए। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में विभिन्न परिवहन संगठन 4 अगस्त 2026 को संसद की ओर मार्च निकालेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार E20 ईंधन को एकमात्र विकल्प के रूप में लागू न करे और वाहन मालिकों तथा चालकों को अन्य ईंधन विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं।

‘सांसद सो रहे हैं, उन्हें जगाना होगा’

एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि देशभर से E20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर वाहन चालकों और परिवहन व्यवसायियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि संसद मार्च का उद्देश्य सांसदों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है।

उन्होंने कहा कि “हम 4 अगस्त को संसद मार्च निकालकर सांसदों को जगाने का प्रयास करेंगे।”

प्रदर्शन को बताया गैर-राजनीतिक

संजय सम्राट ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन का ‘ई-20 जनता पार्टी’ या ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ जैसे किसी संगठन या ऑनलाइन अभियान से कोई संबंध नहीं है। उनका दावा है कि यह पूरी तरह ट्रांसपोर्ट सेक्टर की समस्याओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने दिया समर्थन

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को E20 ईंधन को अनिवार्य बनाने के बजाय वाहन मालिकों को विकल्प देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई वाहन चालक और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर E20 ईंधन को लेकर चिंतित हैं, इसलिए सरकार को उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर भी विचार करना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा नहीं की गई है।

E20 पेट्रोल क्या है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का उद्देश्य इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है। हालांकि कुछ वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि पुराने वाहनों में E20 के उपयोग को लेकर तकनीकी और रखरखाव संबंधी चिंताएं हैं।

क्या हैं ट्रांसपोर्टर्स की प्रमुख मांगें?

  • E20 पेट्रोल को एकमात्र ईंधन विकल्प न बनाया जाए।
  • वाहन मालिकों को सामान्य पेट्रोल सहित अन्य विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं।
  • E20 के प्रभाव पर विस्तृत तकनीकी अध्ययन सार्वजनिक किया जाए।
  • ट्रांसपोर्ट सेक्टर और ऑटोमोबाइल उद्योग से व्यापक संवाद किया जाए।

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