“केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी आंदोलन पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार सच और अहिंसक आंदोलन से डरती है। जानिए केन-बेतवा परियोजना, आदिवासी आंदोलन और राहुल गांधी के पूरे बयान की प्रमुख बातें।“
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में चल रहे आदिवासी आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोमवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार सत्य और अहिंसक प्रतिरोध दोनों से डरती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे आदिवासियों की आवाज सुनने के बजाय उनके आंदोलन को बलपूर्वक दबाया गया।
‘सत्याग्रह कर रहे थे आदिवासी, लेकिन उनकी आवाज दबाई गई’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन केन-बेतवा परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई अपनी जमीन के उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस बल के जरिए समाप्त कर दिया गया।
‘जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार आदिवासियों का’
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी देश के मूल निवासी हैं और जल, जंगल तथा जमीन पर पहला अधिकार उनका है। उनके अनुसार, आदिवासी समुदाय अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
उन्होंने लिखा कि आदिवासियों की मांग केवल इतनी है कि उन्हें आजीविका का उचित साधन, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए। यदि ऐसा नहीं होता तो उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा।
कांग्रेस ने न्याय दिलाने का दिया भरोसा
कांग्रेस नेता ने प्रदर्शनकारी आदिवासी समुदायों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित कराने के लिए कांग्रेस हर संभव प्रयास करेगी।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के साथ मध्य प्रदेश में चल रहे आदिवासी आंदोलन से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया।
15 दिन बाद समाप्त हुआ आंदोलन
उल्लेखनीय है कि 19 जुलाई को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटाया था। इसके साथ ही करीब 15 दिनों से जारी आदिवासी आंदोलन समाप्त हो गया था। प्रदर्शनकारी केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे थे।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?
करीब 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इस परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा देना है।
जंतर-मंतर पर चर्चा में आए युवक से भी मिले राहुल
सोमवार को राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान संविधान की प्रस्तावना पढ़कर चर्चा में आए मोहम्मद इरफान से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इरफान जैसे जागरूक और संवेदनशील युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। राहुल ने सोशल मीडिया पर इरफान के साथ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि देश का भविष्य ऐसे युवाओं के हाथों में सुरक्षित है, जो अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग हैं।
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