बिहार के बाद असम में भी CJP प्रदर्शनकारियों को राहत, सरकार ने केस वापस लेने का किया ऐलान

बिहार और असम सरकार ने NEET-UG प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का फैसला किया है। जानिए सरकार के फैसले, CJP की प्रतिक्रिया और पूरे घटनाक्रम की पूरी जानकारी।

नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बिहार के बाद असम में भी बड़ी राहत मिली है। दोनों राज्य सरकारों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का फैसला किया है। इस निर्णय को आंदोलन में शामिल छात्रों और संगठनों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

बिहार सरकार ने मुकदमे वापस लेने का किया फैसला

बिहार सरकार ने घोषणा की है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर), परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन में नामित लोगों के खिलाफ भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।

असम सरकार ने भी दी राहत

बिहार के फैसले के बाद असम सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई का निर्णय लिया है। असम के गृह एवं राजनीतिक विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को राहत दी जाएगी।

बिहार में 694 लोगों को लिया गया था हिरासत में

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान बिहार के विभिन्न जिलों में कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिग शामिल थे, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वहीं 355 अन्य लोगों को हिंसक घटनाओं में कथित संलिप्तता के आधार पर न्यायालय में पेश किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में 91 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए थे। सारण जिले में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि सिवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई थीं।

CJP ने पहले दी थी दोबारा आंदोलन की चेतावनी

इससे पहले काकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार मंगलवार तक लिखित आश्वासन नहीं देती, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले धरने के समापन से पहले केंद्र सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में देशभर में दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी थी।

कानूनी सहायता के लिए कपिल सिब्बल ने की ₹1 करोड़ की घोषणा

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि किसी भी राज्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है, तो उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने इसके लिए ₹1 करोड़ की सहायता राशि देने की घोषणा की। सिब्बल ने आशंका जताई कि कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, इसलिए जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी संरक्षण दिया जाएगा।

लिखित समझौते का इंतजार

CJP का कहना है कि केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में नए मुकदमे दर्ज नहीं करने पर सहमति बनी थी। संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस संबंध में जल्द लिखित समझौता जारी करेगी।

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