“ईरान-अमेरिका तनाव के बीच तेहरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका की शर्तों पर बातचीत नहीं करेगा। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने होर्मुज स्ट्रेट और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर सख्त बयान दिया है। जानिए मिडिल ईस्ट संकट की पूरी अपडेट।“
तेहरान। ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा है कि तेहरान की अमेरिका के साथ बातचीत करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका को बातचीत की शर्तें तय करने की अनुमति नहीं देगा।
गरीबाबादी ने अमेरिकी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वॉशिंगटन यह तय नहीं कर सकता कि उसे कब युद्ध करना है और कब कूटनीति के रास्ते पर लौटना है।
‘अमेरिका जब चाहे युद्ध और जब चाहे बातचीत नहीं कर सकता’
ईरान के सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में गरीबाबादी ने कहा कि दुनिया को अमेरिका की इस नीति की आदत नहीं डालनी चाहिए कि वह अपनी सुविधा के अनुसार पहले सैन्य कार्रवाई करे और फिर बातचीत की पेशकश करे।
उन्होंने कहा, “अमेरिका यह नहीं चुन सकता कि उसे कब लड़ाई करनी है और कब बातचीत की मेज पर बैठना है।”
ईरानी अधिकारी ने दावा किया कि संघर्ष खत्म करने के लिए संदेश अमेरिका की ओर से भेजे गए थे।
ट्रंप के बयान पर ईरान की प्रतिक्रिया
गरीबाबादी का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान ने अमेरिका से हमले रोकने की अपील की थी और बातचीत की इच्छा जताई थी।
ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि दोनों पक्ष नए युद्धविराम समझौते तक नहीं पहुंचते हैं तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।
हालांकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे को स्वीकार नहीं किया और बातचीत को लेकर अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अपना सख्त रुख दोहराया है। गरीबाबादी ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी नौसैनिक हस्तक्षेप को ईरान अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट के पास आने वाले विदेशी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरानी अधिकारी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता, क्योंकि यह ईरान की रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
यूरोपीय नौसेना को भी चेतावनी
गरीबाबादी ने यूरोपीय देशों की नौसेना को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई यूरोपीय नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पास आता है तो वह ईरान के लिए वैध लक्ष्य माना जाएगा।
यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा गया था कि कुछ यूरोपीय देश समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के अमेरिकी प्रयासों में शामिल हो सकते हैं।
अमेरिका ने समुद्री ऑपरेशन बढ़ाया
दूसरी ओर, अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों को बढ़ाने की बात कही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, मध्य पूर्व में 20 से अधिक अमेरिकी नौसैनिक जहाज विभिन्न अभियानों में शामिल हैं।
CENTCOM ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और प्रतिबंधों के पालन को लेकर कार्रवाई जारी रखने की जानकारी दी है।
तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते की तलाश जारी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ दोनों देश सैन्य तैयारियों और सख्त बयानों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।
फिलहाल ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है और किसी भी समझौते में अपनी शर्तों को प्राथमिकता देगा।
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