“हिमाचल प्रदेश में मानसून के 43 दिनों में बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ सड़क हादसों में 163 लोगों की मौत हो गई। 257 लोग घायल हैं और प्रदेश को 910.34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।“
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश आफत बनकर बरस रही है। लगातार बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ सड़क हादसों ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून से 11 अगस्त के बीच 43 दिनों में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं में कुल 163 लोगों की मौत हो चुकी है।
इनमें 70 मौतें मानसून से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई हैं, जबकि 93 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई है। इस दौरान 257 लोग घायल हुए हैं, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं और बारिश से प्रदेश को अब तक 910.34 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
प्राकृतिक आपदाओं में 70 लोगों की मौत
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से अब तक 70 लोगों की जान गई है। इनमें सबसे अधिक मौतें पेड़ या ऊंची चट्टानों से गिरने के कारण हुई हैं। इस तरह के हादसों में प्रदेश में 23 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
भूस्खलन भी जानलेवा साबित हुआ है। प्रदेश में लैंडस्लाइड की घटनाओं में अब तक 14 लोगों की मौत हुई है। इनमें सबसे ज्यादा 13 मौतें अकेले लाहौल-स्पीति जिले में दर्ज की गई हैं। चंबा में भी भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की जान गई है।
शिमला में पेड़ और चट्टान से गिरने के सबसे ज्यादा मामले
पेड़ या ऊंची चट्टानों से गिरने के कारण हुई मौतों में शिमला जिला सबसे आगे है। यहां छह लोगों की जान गई है। कुल्लू में पांच, चंबा में चार, मंडी में तीन और कांगड़ा में दो लोगों की मौत हुई है।
इसके अलावा हमीरपुर, किन्नौर और सिरमौर जिलों में भी एक-एक व्यक्ति की जान गई है। बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में कमजोर चट्टानों और फिसलन भरे रास्तों के कारण इस तरह के हादसों का खतरा बढ़ गया है।
सांप के काटने से सात की मौत
मानसून के दौरान सांप के काटने के मामले भी सामने आए हैं। प्रदेश में अब तक सात लोगों की मौत सर्पदंश से हुई है। इनमें कांगड़ा जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां चार लोगों की जान गई। सिरमौर में दो और ऊना में एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है।
वहीं, करंट की चपेट में आने से छह लोगों की मौत हुई है। कांगड़ा और ऊना में दो-दो तथा हमीरपुर और शिमला में एक-एक मौत दर्ज की गई है।
डूबने और अचानक बाढ़ से भी गई जान
रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून के दौरान डूबने से चार लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा आगजनी की घटना में एक व्यक्ति की जान गई, जबकि कांगड़ा में अचानक आई बाढ़ के कारण भी एक व्यक्ति की मौत हुई है।
बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और अचानक बाढ़ आने से पहाड़ी क्षेत्रों में खतरा लगातार बना हुआ है।
सड़क हादसों में 93 लोगों की मौत
प्राकृतिक आपदाओं के साथ हिमाचल में सड़क दुर्घटनाएं भी जानलेवा साबित हो रही हैं। 30 जून से 11 अगस्त के बीच सड़क हादसों में कुल 93 लोगों की मौत हुई है।
जिलावार आंकड़ों में चंबा सबसे आगे है। यहां सड़क दुर्घटनाओं में 16 लोगों की जान गई है। इसके बाद कुल्लू में 13, सिरमौर में 12, शिमला में 11 और कांगड़ा में 10 लोगों की मौत हुई है।
सोलन में आठ, ऊना में छह, किन्नौर में पांच, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति में चार-चार, मंडी में तीन और हमीरपुर में एक व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हुई है।
910 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
मानसून की बारिश ने हिमाचल प्रदेश के जनजीवन और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 30 जून से 11 अगस्त तक प्रदेश को कुल 910.34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने, मार्गों पर मलबा आने और अन्य ढांचागत नुकसान की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं।
मानसून ने बढ़ाई मुश्किलें
हिमाचल में मानसून के अभी तक के आंकड़े बताते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं का दोहरा खतरा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। भूस्खलन, अचानक बाढ़ और पेड़-चट्टानों के गिरने जैसी घटनाओं के साथ सड़क हादसों में हो रही मौतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
बारिश के बीच पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आपदा की स्थिति में राहत-बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।








