सुप्रीम कोर्ट की कुकी-मैतेई समूहों से अपील: लड़ाई से थक गए होंगे, शांति बहाली और हाईवे खोलने पर करें विचार

मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुकी और मैतेई समूहों से शांति बहाल करने और बंद सड़कों व हाईवे को खोलने की दिशा में कदम उठाने को कहा। कोर्ट ने दोनों पक्षों से दो सप्ताह में बंद सड़कों की जानकारी और उन्हें खोलने के सुझाव मांगे हैं।

नई दिल्ली। मणिपुर में तीन साल से अधिक समय से जारी जातीय हिंसा के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुकी और मैतेई समुदायों के संगठनों से शांति बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष लंबे समय से चल रही लड़ाई से थक गए होंगे और अब उन्हें विवाद को समाप्त करने तथा राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के बारे में सोचना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों समुदायों के संगठनों से विशेष रूप से सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने की दिशा में काम करने को कहा। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।

‘हाईवे किसी भी इलाके की लाइफलाइन’

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हाईवे और सड़कें किसी भी इलाके की लाइफलाइन होती हैं, क्योंकि जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति इन्हीं मार्गों से होती है। सड़कों की नाकाबंदी से आम लोगों को परेशानी होती है और किसी भी पक्ष को इसका फायदा नहीं मिलता।

पीठ ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप इस समय मुख्य मुद्दा नहीं होना चाहिए। दोनों पक्षों को मिलकर शांति बहाल करने और सड़क संपर्क सामान्य करने का ठोस रास्ता तलाशना चाहिए।

कोर्ट ने कहा- हाईवे ब्लॉक करना गंभीर मामला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करना गंभीर विषय है, लेकिन अदालत के आदेश से हाईवे खुलवाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। इसलिए दोनों पक्षों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करेगा कि दोनों समूह हाईवे खोलने के लिए काम करें। इसी क्रम में केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

कुकी पक्ष ने हिंसा के खिलाफ होने की बात कही

याचिकाकर्ता कुकी महिला मानवाधिकार संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने अदालत के समक्ष कहा कि उनका संगठन किसी भी प्रकार की हिंसा और हत्या के खिलाफ है। उन्होंने शांति स्थापित करने और सड़कों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने का समर्थन किया।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि मैतेई समुदाय की ओर से भी कई मार्ग अवरुद्ध किए जा रहे हैं, जिसके कारण जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

मैतेई पक्ष ने कुकी संगठन पर लगाए आरोप

सुनवाई के दौरान बीच-बचाव करने वाले अंतरराष्ट्रीय मैतेई संगठन की ओर से पेश वकील ने कुकी पक्ष की याचिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि याचिका शरारतपूर्ण तरीके से दाखिल की गई है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों और हाईवे को अवरुद्ध करने के लिए कुकी समूह जिम्मेदार हैं।

वकील ने अदालत को बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से सड़कों को खोलने की अपील किए जाने के बावजूद कुछ स्थानों पर रास्ते अवरुद्ध किए जा रहे हैं।

दो सप्ताह में बंद सड़कों की जानकारी मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह का समय देते हुए राज्य में अवरुद्ध सड़कों की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। साथ ही, कोर्ट ने पूछा है कि इन मार्गों को दोबारा खोलने के लिए क्या व्यावहारिक तरीका अपनाया जा सकता है।

पीठ ने मैतेई संगठन के वकील को भी अवरुद्ध सड़कों का विवरण देते हुए नई याचिका दाखिल करने और मामले में पक्षकारों से संबंधित दस्तावेजों में आवश्यक बदलाव करने की अनुमति दी है।

‘सड़क बंद होने से सभी के हित प्रभावित’

पीठ ने कहा कि सड़कों की नाकाबंदी से किसी एक समुदाय को नहीं, बल्कि सभी के हितों को नुकसान पहुंचता है। जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर किसी पेशेवर एजेंसी की मदद ली जा सकती है या बातचीत और समझौते के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है, ताकि सड़क संपर्क बहाल हो और लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

एनएच-2 खोलने की मांग

कुकी महिला मानवाधिकार संगठन ने अपनी याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर लगी रोक हटाने और कुकी बहुल इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। एनएच-2 इंफाल को नागालैंड के दीमापुर से जोड़ता है और मणिपुर के लिए महत्वपूर्ण सड़क संपर्क मार्ग है।

2023 से जारी है मणिपुर में जातीय हिंसा

मणिपुर में मई 2023 में इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद से राज्य में लंबे समय तक तनाव और हिंसा की स्थिति बनी रही है।

इस संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की ताजा पहल का उद्देश्य सड़क संपर्क बहाल करने के साथ-साथ दोनों समुदायों के बीच संवाद और शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता तलाशना है।

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