“लखनऊ के क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र की प्रयोगशाला को 17 अगस्त 2026 से NABL और FSSAI Integrated Accreditation मिल गया है। इससे किसानों, FPO, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और उद्यमियों को विश्वसनीय गुणवत्ता परीक्षण की सुविधा मिलेगी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा के क्षेत्र में परीक्षण सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अंतर्गत संचालित क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र (आर-फ्रैक), लखनऊ की प्रयोगशाला को 17 अगस्त 2026 से NABL (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) और FSSAI Integrated Accreditation प्राप्त हो गया है। केंद्र की ओर से जारी विज्ञप्ति में इसे प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला अहम कदम बताया गया है।
किसानों और खाद्य उद्यमियों को मिलेगा लाभ
मान्यता मिलने के बाद प्रदेश के किसानों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs), खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और उद्यमियों को अपने कृषि एवं खाद्य उत्पादों का वैज्ञानिक और विश्वसनीय गुणवत्ता परीक्षण कराने की सुविधा मिलेगी। इससे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच आसान होगी
यह सुविधा खास तौर पर उन किसानों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जो अपने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं। मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से मिलने वाली परीक्षण रिपोर्ट उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करने में मददगार होंगी।
इसके अलावा, परीक्षण रिपोर्ट के माध्यम से APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) तथा AgMark से संबंधित गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। इससे निर्यात के इच्छुक उद्यमियों के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
आर-फ्रैक, लखनऊ को NABL और FSSAI Integrated Accreditation मिलने से उत्तर प्रदेश में खाद्य उत्पादों के वैज्ञानिक परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश के उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
उपमुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में प्रयासों का परिणाम
केंद्र के अनुसार यह उपलब्धि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दिशा-निर्देशन और उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा के मार्गदर्शन में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। केंद्र की प्रयोगशाला को मिली यह मान्यता प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता परीक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों को मिलेगी नई ताकत
NABL और FSSAI की इंटीग्रेटेड मान्यता से प्रदेश में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए विश्वसनीय परीक्षण सुविधा उपलब्ध होगी। इसका सीधा लाभ किसानों, FPO, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और नए खाद्य उद्यमों को मिलने की उम्मीद है। साथ ही, बेहतर गुणवत्ता और मानकीकरण के जरिए उत्तर प्रदेश के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की घरेलू और वैश्विक बाजारों में पहचान और पहुंच को और मजबूत किया जा सकेगा।







