
“UPI पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4% MDR चार्ज के विरोध में यूपी के व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। कानपुर में QR कोड हटाकर ढोल-नगाड़े बजाकर प्रदर्शन किया।“
कानपुर। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क के विरोध में उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने गांधी जयंती पर ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर विरोध दर्ज कराया। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। कानपुर में सागर मार्केट कैनाल रोड के बाहर व्यापारियों ने दुकानों से UPI QR Code हटाए और उन पर काला कपड़ा डालकर अपना विरोध जताया।
व्यापारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और ढोल-नगाड़े तथा डमरू बजाकर ‘व्यापारियों की आवाज सुनो सत्याग्रह’ के तहत प्रदर्शन किया। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित शुल्क से खासकर छोटे और कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क का विरोध
व्यापारी संगठन के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लगाए जाने की तैयारी है। इस शुल्क पर 18 प्रतिशत GST जोड़ने के बाद प्रभावी लागत करीब 0.472 प्रतिशत हो जाएगी।
व्यापारियों का तर्क है कि छोटे और गैर-पंजीकृत कारोबारियों को इस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। ऐसे में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर उन्हें सीधे अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ सकती है।
‘1 से 2 प्रतिशत मार्जिन में आधा प्रतिशत शुल्क कैसे दें?’
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि मोबाइल बाजार से लेकर अन्य होलसेल और रिटेल कारोबार में व्यापारियों का मार्जिन कई मामलों में केवल 1 से 2 प्रतिशत के आसपास रह गया है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर करीब आधा प्रतिशत का शुल्क लगने से कारोबार की लागत पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने से नकदी प्रबंधन तथा नोटों की छपाई से जुड़े खर्च में बचत होती है, तो डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे की लागत उसी व्यवस्था से क्यों नहीं पूरी की जाती।
त्योहारी सीजन में नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका
व्यापारियों ने कहा कि दीपावली और अन्य त्योहारों के दौरान बाजार में खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि UPI Payment पर MDR Charge लगाया जाता है तो इसका असर व्यापारी और ग्राहक दोनों पर पड़ सकता है।
संगठन का दावा है कि डिजिटल भुगतान महंगा होने की स्थिति में कुछ व्यापारी और ग्राहक दोबारा Cash Payment की ओर रुख कर सकते हैं। व्यापारियों ने कहा कि इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
फैसला वापस होने तक जारी रहेगा विरोध
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि वे UPI पर MDR शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक शुल्क संबंधी फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शुल्क बढ़ाने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े।
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