TGT अंग्रेजी परीक्षा में 33 प्रश्न गलत, हाईकोर्ट ने यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग से मांगा जवाब

TGT English Exam 33 Questions Wrong: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी अंग्रेजी परीक्षा में 125 में से 33 प्रश्न गलत पाए जाने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी व्यवस्था पर जवाब मांगा।

प्रयागराज: TGT English Exam 33 Questions Wrong मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सहायक अध्यापक टीजीटी अंग्रेजी विषय की परीक्षा में कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत पाए जाने के बाद न्यायालय ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर हलफनामे के साथ पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग से पूछा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है, विशेषज्ञों का चयन कैसे होता है और परीक्षा किस प्रकार आयोजित की जाती है।

पहले 29 प्रश्न सिलेबस से बाहर, फिर कुल 33 प्रश्न गलत मिलेमामले की सुनवाई के दौरान पहले यह सामने आया कि 29 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। बाद में विषय विशेषज्ञों की समीक्षा में चार अन्य प्रश्न भी गलत पाए गए। इस प्रकार कुल 33 प्रश्न, यानी लगभग 26 प्रतिशत प्रश्न, त्रुटिपूर्ण निकले।

आयोग ने अंक बांटकर जारी की संशोधित चयन सूची

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अदालत को बताया कि गलत पाए गए प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में समायोजित कर दिए गए हैं। इसके आधार पर नई संशोधित चयन सूची तैयार की गई, जिसमें 42 अतिरिक्त अभ्यर्थियों को चयनित किया गया।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस समाधान पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर प्रश्नों में त्रुटियां केवल अंक बांटकर दूर नहीं की जा सकतीं।

हाईकोर्ट ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल

कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत निकलते हैं तो यह पूरी प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अदालत ने आयोग को आत्मनिरीक्षण करने और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की आवश्यकता बताई।

अब आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने, विशेषज्ञों की नियुक्ति, गुणवत्ता परीक्षण और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जाती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव भविष्य की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली पर पड़ सकता है। यदि अदालत सख्त दिशा-निर्देश जारी करती है तो भर्ती परीक्षाओं में गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया और मजबूत हो सकती है।

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