
“काशी विश्वनाथ मंदिर के SDM शंभू शरण पर परिवाद दर्ज किया गया है। वाराणसी की विशेष SC-ST कोर्ट ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए उन्हें 3 नवंबर को तलब किया है। जानिए पूरा मामला।“
काशी विश्वनाथ मंदिर के SDM शंभू शरण पर परिवाद दर्ज किया गया है। वाराणसी की विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने समन जारी करते हुए शंभू शरण को 3 नवंबर 2026 को तलब किया है।
मामला मंदिर परिसर में एक श्रद्धालु के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता बाबूलाल सोनकर ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर घटना की जानकारी दी थी।
16 फरवरी की रात मंदिर परिसर में जाने का मामला
शिकायतकर्ता बाबूलाल सोनकर के अनुसार, वह 16 फरवरी 2026 की रात करीब 12:30 बजे अपने एक परिचित के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर गए थे। उनका आरोप है कि उस समय तत्कालीन एसडीएम शंभू शरण अपने निजी बाउंसरों के साथ परिसर में मौजूद थे।
शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान आम श्रद्धालुओं के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की जा रही थी। बाबूलाल सोनकर ने आरोप लगाया कि एसडीएम के इशारे पर बाउंसरों ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ गाली-गलौज की।
जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि घटना के दौरान सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें अपमानित किया गया।
बाबूलाल सोनकर का यह भी आरोप है कि जब उनके साथ मौजूद परिचित ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उसके साथ भी मारपीट की गई।
इन आरोपों के आधार पर शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी।
अस्पताल में भर्ती होने का दावा
शिकायतकर्ता के मुताबिक, घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने घटना की सूचना वाराणसी के चौक थाने को भी दी थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाने में सूचना देने के बावजूद मामले में FIR दर्ज नहीं की गई और पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस आयुक्त से भी की गई थी शिकायत
जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने 10 मार्च 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से पुलिस आयुक्त वाराणसी को भी शिकायत भेजी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई।
इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया और अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य पेश किए।
बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आधार पर कोर्ट का आदेश
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सुधाकर राय की अदालत में हुई। शिकायतकर्ता की ओर से दिए गए बयान और पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया।
अदालत ने मामले में समन जारी करते हुए शंभू शरण को 3 नवंबर 2026 को तलब किया है।
अब 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 3 नवंबर है। उस दिन संबंधित अधिकारी को अदालत के समक्ष उपस्थित होना है। मामला श्रद्धालु के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और एससी-एसटी कानून से जुड़े आरोपों के संदर्भ में अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
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