यूपी भाजपा संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी, घटेगी महामंत्रियों और उपाध्यक्षों की संख्या

प्रदेश इकाई का आकार छोटा करने पर मंथन तेज, क्षेत्रीय संतुलन के साथ नए चेहरों को मिलेगा मौका

उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। महामंत्रियों की संख्या 7 से घटाकर 6 की जाएगी, जबकि उपाध्यक्षों और मंत्रियों की संख्या में भी फेरबदल संभव है। यूपी विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पार्टी संगठन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यह बदलाव प्रदेश की राजनीतिक संरचना और संगठनात्मक संतुलन को प्रभावित करेगा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में पार्टी प्रदेश इकाई को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव में महामंत्रियों की संख्या सात से घटाकर छह किए जाने की योजना है, जबकि उपाध्यक्षों और प्रदेश मंत्रियों की संख्या में भी फेरबदल संभव है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।

पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं में यह भी सामने आया है कि प्रदेश इकाई के आकार को छोटा रखने और जिम्मेदारियों को अधिक केंद्रित करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं कुछ नेताओं का तर्क है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में संगठन का व्यापक ढांचा जरूरी है ताकि सभी क्षेत्रों का संतुलित प्रतिनिधित्व बना रहे।

जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में 18 उपाध्यक्षों की संख्या को घटाकर 14 तक करने का विकल्प भी विचाराधीन है, हालांकि इस पर अभी सहमति नहीं बनी है। संगठन के अंदर छह क्षेत्रीय संरचना को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पहले सात महामंत्रियों में से छह को अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी बनाया जाता था, जबकि एक महामंत्री कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्य करता था। हाल ही में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे, जिसके बाद अब नई संरचना पर फिर से मंथन शुरू हुआ है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, काशी, अवध, गोरखपुर, ब्रज, पश्चिम और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रों के बीच संगठनात्मक संतुलन साधना भी बदलाव का अहम आधार होगा। खासकर काशी और गोरखपुर क्षेत्रों को अधिक प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है, जबकि पश्चिम क्षेत्र में उपाध्यक्षों की संख्या में कटौती पर चर्चा है।

कुल मिलाकर, भाजपा यूपी इकाई में यह बदलाव आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, जिससे संगठन को और अधिक प्रभावी और चुनाव-केंद्रित बनाया जा सके।

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