
“सीओ जियाउल हक हत्याकांड: लखनऊ की विशेष CBI अदालत ने राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। कोर्ट के फैसले के बाद मामले में आगे की कार्यवाही नहीं होगी।“
लखनऊ/प्रतापगढ़। बहुचर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक और जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत से राहत मिली है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए राजा भैया समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत के मुताबिक उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) प्रतिभा सिंह की अदालत के आदेश के बाद इस मामले में राजा भैया के अलावा गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ भी कार्यवाही समाप्त हो गई।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने की स्वीकार
सीबीआई ने मामले की दोबारा जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट यानी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, जांच सामग्री और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
अदालत के अनुसार रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं था, जिसके आधार पर नामजद आरोपियों के खिलाफ अपराध का संज्ञान लेकर आगे की न्यायिक कार्यवाही शुरू की जा सके।
दिवंगत CO की पत्नी ने किया था क्लोजर रिपोर्ट का विरोध
जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। उन्होंने नामजद लोगों की भूमिका की दोबारा जांच और आगे की कार्यवाही की मांग की थी।
अदालत ने इस आपत्ति पर विचार करने के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा दस्तावेजी या मौखिक साक्ष्य नहीं है, जिसके आधार पर नामजद आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लिया जा सके। इसके बाद सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।
2013 में बलीपुर में हुई थी जियाउल हक की हत्या
सीओ जियाउल हक की हत्या 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुई थी। वह ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।
इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई। मामले में राजा भैया समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे और उनके खिलाफ जांच की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुई थी जांच
मामले में जियाउल हक की पत्नी की ओर से आगे की जांच की मांग की गई थी। सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजा भैया की भूमिका समेत मामले के संबंधित पहलुओं की दोबारा जांच का रास्ता खुला। इसके बाद सीबीआई ने मामले की नए सिरे से जांच की।
दोबारा जांच के बाद सीबीआई ने फिर क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। अब विशेष सीबीआई अदालत ने उस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए पांचों नामजद लोगों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है।
2024 में दस लोगों को सुनाई गई थी उम्रकैद
जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े मामले में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने अक्टूबर 2024 में दस आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इससे स्पष्ट है कि जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े अलग-अलग आरोपियों और उनके खिलाफ चली न्यायिक कार्यवाहियों को अलग-अलग स्तर पर देखा गया है। वर्तमान आदेश विशेष रूप से राजा भैया समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ आगे की कार्यवाही और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से संबंधित है।
फैसला आने के बाद राजा भैया ने क्या कहा?
अदालत के आदेश के बाद राजा भैया ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”
जनसत्ता दल के नेताओं और समर्थकों ने अदालत के आदेश पर खुशी जताई। पार्टी की ओर से कहा गया कि फैसले के बाद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उत्साह है।
क्या है इस आदेश का मतलब?
अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने का सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा रिकॉर्ड और जांच सामग्री के आधार पर राजा भैया समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे की आपराधिक कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया। अदालत ने इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी।
यह आदेश जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले हुई दोषसिद्धि और सजा से अलग कानूनी कार्यवाही है।
जियाउल हक हत्याकांड में आगे क्या?
विशेष सीबीआई अदालत के ताजा आदेश के बाद इस विशेष कार्यवाही में राजा भैया समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ मामला समाप्त हो गया है। मामले में आगे की कानूनी स्थिति अदालत के आदेश और संबंधित पक्षों द्वारा उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर निर्भर करेगी।
सीओ जियाउल हक हत्याकांड करीब 13 साल से अधिक समय से उत्तर प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में रहा है। ताजा अदालत के आदेश के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में है।
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