“वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे गाएंगे। पार्टी ने 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले को इसका आधार बताया।“
नई दिल्ली। वंदे मातरम् के गायन को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस ने अपना रुख साफ कर दिया है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1937 में लिए गए ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करती है और इसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी।
कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्ल्यूसी की बुधवार को हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 में पारित उस प्रस्ताव के कुछ अंश पढ़े, जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरे गाने का निर्णय लिया गया था।
1937 के फैसले को बनाया आधार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वंदे मातरम् को लेकर वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ था। उनके मुताबिक उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत, सी. राजगोपालाचारी और आचार्य नरेंद्र देव समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
जयराम रमेश ने दावा किया कि यह प्रस्ताव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद पारित किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वह उसी ऐतिहासिक व्यवस्था का पालन कर रही है।
खरगे ने बैठक में पढ़े प्रस्ताव के अंश
सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के प्रस्ताव के कुछ अंश पढ़े। पार्टी ने कहा कि उस समय राष्ट्रगीत को लेकर व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह व्यवस्था तय की गई थी।
जयराम रमेश के मुताबिक, इस विषय पर कांग्रेस का रुख आज भी स्पष्ट है और इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान सभा की अंतिम बैठक में भी यह व्यवस्था दोहराई गई थी कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान रहेगा, जबकि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत के रूप में रहेगा।
केसी वेणुगोपाल बोले- कांग्रेस का रुख बिल्कुल स्पष्ट
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का रुख ‘बिल्कुल स्पष्ट’ है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान कांग्रेस के लिए भावनात्मक विषय हैं, जबकि भाजपा के लिए ये राजनीतिक विषय हैं।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए विवाद के बाद पैदा हुई स्थिति संवादहीनता का नतीजा थी। वेणुगोपाल के मुताबिक, पार्टी अपने रुख को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है और यह अध्याय अब बंद हो चुका है।
उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस 1937 के फैसले का सम्मान करती है और पार्टी के कार्यकर्ता उसी के अनुरूप वंदे मातरम् के दो अंतरे ही गाएंगे।
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुआ था विवाद
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। राष्ट्रगीत के गायन के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी खरगे की ओर कुछ इशारा करती हुई नजर आई थीं।
इसके बाद भाजपा ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम् गाए जाने पर आपत्ति जताई। कांग्रेस ने भाजपा के इस आरोप को खारिज करते हुए इसे गलत व्याख्या बताया था।
अब सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद कांग्रेस ने अपने आधिकारिक रुख को दोहराते हुए कहा है कि पार्टी 1937 में तय व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रगीत के दो अंतरे ही गाएगी।
भाजपा पर मुद्दे को राजनीतिक बनाने का आरोप
जयराम रमेश ने भाजपा पर राष्ट्रीय मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पेपर लीक समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए वंदे मातरम् के मुद्दे को उठा रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत के प्रति पार्टी के मन में पूरा सम्मान है, लेकिन ऐतिहासिक निर्णय और स्थापित परंपरा के अनुसार उसके गायन को लेकर पार्टी का एक निर्धारित तरीका है।
सीडब्ल्यूसी बैठक में कई मुद्दों पर हुई चर्चा
बुधवार को इंदिरा भवन में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में केवल वंदे मातरम् का मुद्दा ही चर्चा के केंद्र में नहीं रहा। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मामलों पर भी चर्चा की।
बैठक दोपहर करीब तीन बजे शुरू हुई और इसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस के कई मुख्यमंत्री भी बैठक में पहुंचे
सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, केरल से वी.डी. सतीशन, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार समेत कई नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया।
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के ताजा रुख के बाद पार्टी ने फिलहाल विवाद को समाप्त करने की कोशिश की है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि वह 1937 के ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप राष्ट्रगीत के दो अंतरे ही गाएगी और इस व्यवस्था में बदलाव को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।








