“UP Election 2027: योगी सरकार छह करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं को साधने की तैयारी में है। महिलाओं को सीधी आर्थिक मदद, पेंशन बढ़ाने और कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं का दायरा बढ़ाने पर विचार चल रहा है।“
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दलों ने महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने की रणनीति तेज कर दी है। सत्तारूढ़ भाजपा भी प्रदेश की छह करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं को केंद्र में रखकर बड़े फैसलों की तैयारी में जुटी है। योगी सरकार महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद देने से लेकर पहले से संचालित योजनाओं की सहायता राशि बढ़ाने और नई महिला केंद्रित योजना शुरू करने जैसे विकल्पों पर मंथन कर रही है।
राजनीतिक तौर पर इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के बीच सरकार की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों से पहले भी महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ देने वाली योजनाओं पर जोर दिया गया था। अब उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह के विकल्पों पर विचार चल रहा है।
महिलाओं के खाते में सीधे आर्थिक मदद का विकल्प
सरकार के सामने सबसे अहम विकल्प महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने का है। इसके अलावा पहले से चल रही महिला केंद्रित योजनाओं में सहायता राशि बढ़ाने और उनके लाभार्थियों का दायरा विस्तृत करने पर भी विचार किया जा रहा है।
तीसरा विकल्प नई महिला केंद्रित योजना शुरू करने का है। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले सरकार वित्तीय भार, संभावित लाभार्थियों की संख्या और योजना के प्रभाव का आकलन कर रही है। सरकार के सामने चुनौती ऐसी योजना तैयार करने की है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचे और उसका असर जमीन पर भी दिखाई दे।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सहायता दोगुनी
योगी सरकार पहले से ही महिलाओं और बेटियों से जुड़ी योजनाओं पर जोर दे रही है। इसी साल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सहायता राशि को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में भी महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। अब अनुपूरक बजट के जरिये वृद्धावस्था, दिव्यांग और निराश्रित महिला पेंशन को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की तैयारी है।
वर्ष 2017 में इन पेंशन योजनाओं के तहत 300 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। ऐसे में प्रस्तावित बढ़ोतरी को सरकार महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सहयोग के बड़े कदम के रूप में पेश कर सकती है।
बेटियों के लिए बढ़ सकता है योजनाओं का दायरा
सरकार की नजर बेटियों से जुड़ी योजनाओं पर भी है। कन्या सुमंगला योजना के तहत तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में अधिकतम 25 हजार रुपये की सहायता दी जाती है।
अब योजना में सहायता राशि बढ़ाने के साथ ही इसके दायरे का विस्तार करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मेधावी छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटर देने की घोषणा भी की जा चुकी है। इसके वितरण कार्यक्रम को लेकर भी सरकार स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का विस्तार भी सरकार की प्राथमिकताओं में है। इसके तहत तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की रणनीति केवल सीधे आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं को भी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।
छह करोड़ से ज्यादा महिला मतदाता निभाएंगी अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश में इस समय छह करोड़ से अधिक महिला मतदाता हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी में महिला मतदाताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया था। ऐसे में 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रही भाजपा के लिए महिला वोट बैंक बेहद अहम है।
इसी को देखते हुए पार्टी और सरकार महिलाओं के लिए योजनाओं और आर्थिक लाभों को और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। संभावित रूप से सीधे खाते में आर्थिक सहायता देने वाली किसी नई योजना की घोषणा भी चुनावी संकल्प या बजट के जरिये सामने आ सकती है।
सुरक्षा से आर्थिक आत्मनिर्भरता तक संदेश देने की तैयारी
सरकार की रणनीति महिलाओं के बीच यह संदेश मजबूत करने की है कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान के साथ शिक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यदि सीधे आर्थिक सहायता वाली नई योजना लागू होती है तो यह महिला मतदाताओं के बीच सरकार की योजनाओं का प्रभाव बढ़ाने का एक और माध्यम बन सकती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार किस प्रारूप में महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद देगी। अंतिम निर्णय वित्तीय संसाधनों, लाभार्थियों की संख्या और योजना के संभावित प्रभाव के आकलन के बाद लिया जाएगा। चुनावी वर्ष में इस प्रस्ताव पर होने वाला फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








