“सीतापुर जिला अस्पताल के गेट पर जाम को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल और चौकी प्रभारी स्वाति चतुर्वेदी में तीखी बहस हुई। एंबुलेंस फंसीं और मरीजों को परेशानी हुई।“
सीतापुर। जिला अस्पताल के गेट पर लगे जाम को लेकर मंगलवार को भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल और सदर चौकी प्रभारी स्वाति चतुर्वेदी के बीच तीखी बहस हो गई। बातचीत के दौरान चौकी प्रभारी ने कथित तौर पर भाजपा जिलाध्यक्ष से कहा कि उनका वीडियो बनाया जा रहा है तो उन्हें निलंबित करा दिया जाए, इससे ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत होती रही। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष वहां से लौट गए और पूरे मामले की जानकारी एसपी अंकुर अग्रवाल को दी।
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष और चौकी प्रभारी के बीच अस्पताल गेट पर जाम को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अस्पताल गेट पर जाम को लेकर हुई कहासुनी
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर ई-रिक्शा के कारण काफी देर तक जाम की स्थिति बनी हुई थी। इससे अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
इसी दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने चौकी प्रभारी स्वाति चतुर्वेदी से जाम की समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि अस्पताल गेट पर जाम लगा है और पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कई एंबुलेंस जाम में फंसी हुई हैं।
‘निलंबित करा दीजिए’ कहने का आरोप
भाजपा जिलाध्यक्ष के सवाल पर चौकी प्रभारी स्वाति चतुर्वेदी कथित तौर पर नाराज हो गईं। उन्होंने जिलाध्यक्ष से कहा कि उनका वीडियो बनाया जा रहा है और वह उन्हें निलंबित करा दें।
जिलाध्यक्ष ने जवाब दिया कि वह उनका वीडियो नहीं बना रहे हैं और केवल समस्या की जानकारी दे रहे हैं। उनका कहना था कि जाम की समस्या का समाधान कराना पुलिस की जिम्मेदारी है।
बातचीत के दौरान चौकी प्रभारी ने अपनी ड्यूटी का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पोस्टमार्टम में ड्यूटी लगी है और जाम की समस्या उनका काम नहीं है। दोनों के बीच काफी देर तक इस मुद्दे पर बहस होती रही।
करीब 30 मिनट चली बातचीत
भाजपा जिलाध्यक्ष और चौकी प्रभारी के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई। इसके बाद राजेश शुक्ल वहां से लौट गए। उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल को दी।
मामले में आगे पुलिस प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर बनी हुई है।
जाम में फंसी एंबुलेंस, मरीजों को गोद में लेकर पहुंचे तीमारदार
अस्पताल गेट पर जाम की स्थिति इतनी गंभीर थी कि एंबुलेंस तक अस्पताल परिसर के भीतर नहीं पहुंच पा रही थीं। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी हुई।
जाम के कारण कुछ तीमारदार मरीजों को गोद में उठाकर अस्पताल के भीतर ले जाते दिखाई दिए। अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना था कि मुख्य गेट पर रास्ता बाधित होने के कारण उन्हें इलाज के लिए पहुंचने में दिक्कत हुई।
आरोप है कि जाम हटाने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिसकर्मी नजर नहीं आए। इससे स्थिति और बिगड़ गई।
चेन छिनने की शिकायत लेकर पहुंची महिला को भी परेशानी
जिला अस्पताल में अपनी बेटी के साथ दवा लेने पहुंचीं शास्त्री नगर निवासी अर्चना शुक्ला ने भी पुलिस व्यवस्था को लेकर शिकायत की। उनका आरोप है कि अस्पताल परिसर में किसी ने उनकी चेन छीन ली।
अर्चना के अनुसार, घटना की शिकायत लेकर जब वह अस्पताल चौकी पहुंचीं तो वहां मौजूद दारोगा स्वाति चतुर्वेदी ने उनका प्रार्थना पत्र लेने से इनकार कर दिया और उन्हें कोतवाली जाकर शिकायत करने के लिए कहा।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
एक तरफ अस्पताल के मुख्य गेट पर जाम और एंबुलेंस फंसने की स्थिति, दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष और चौकी प्रभारी के बीच हुई तीखी बहस ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं, चेन छिनने की शिकायत को लेकर महिला द्वारा लगाए गए आरोपों ने भी अस्पताल परिसर में पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन आरोपों और वायरल वीडियो के आधार पर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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