वुड पैनल इंडस्ट्री से जेनेरिक दवाओं तक, आज तीन अहम मुद्दों पर मंथन करेगी संसदीय समिति

रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति आज तीन बैठकें करेगी। वुड पैनल इंडस्ट्री में सब्सिडी वाले यूरिया के डायवर्जन, उर्वरक योजनाओं और जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाओं पर चर्चा होगी।

नई दिल्ली। रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति सोमवार को तीन अहम बैठकों में वुड पैनल इंडस्ट्री, उर्वरक सब्सिडी और जेनेरिक दवाओं से जुड़े मुद्दों पर मंथन करेगी। समिति की पहली बैठक में भारतीय वुड पैनल इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर केस स्टडी के माध्यम से चर्चा होगी। वहीं दूसरी बैठक में उर्वरक सब्सिडी और नवाचार योजनाओं के मूल्यांकन तथा निगरानी पर विचार किया जाएगा। तीसरी बैठक में जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के बीच अंतर, विशेष रूप से जागरूकता और भरोसे की कमी से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।

वुड पैनल सेक्टर में सब्सिडी वाले यूरिया के इस्तेमाल पर चर्चा

समिति की पहली बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन परिसर में होगी। इसमें भारतीय वुड पैनल इंडस्ट्री से संबंधित एक केस स्टडी पर चर्चा की जाएगी। बैठक के दौरान पाहले इंडिया फाउंडेशन (PIF) के प्रतिनिधि ‘भारत में सब्सिडी वाले एग्रीकल्चरल यूरिया का इंडस्ट्री में डायवर्जन: इंडियन वुड पैनल इंडस्ट्री पर एक केस स्टडी’ विषय पर करीब 30 मिनट का प्रस्तुतीकरण देंगे।

यह बैठक PIF की ओर से 9 जून को जारी किए गए व्हाइट पेपर और प्रस्तुतीकरण के करीब तीन महीने बाद हो रही है। इसमें सब्सिडी वाले कृषि यूरिया के कथित तौर पर औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन से जुड़े मुद्दे को सामने रखा गया था।

अध्ययन के मुताबिक किसानों के लिए भारी सब्सिडी पर उपलब्ध नीम-कोटेड कृषि यूरिया को कथित तौर पर औद्योगिक बाजार की ओर डायवर्ट किए जाने की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है।

प्लाइवुड, पार्टिकल बोर्ड और MDF उद्योग पर फोकस

वुड पैनल क्षेत्र में प्लाइवुड, पार्टिकल बोर्ड और मीडियम-डेंसिटी फाइबरबोर्ड (MDF) बनाने वाले उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों में यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड (UF) रेजिन का इस्तेमाल प्रमुख बाइंडिंग एडहेसिव के रूप में किया जाता है।

केस स्टडी में सब्सिडी वाले कृषि यूरिया और बाजार में उपलब्ध औद्योगिक-ग्रेड यूरिया के बीच कीमत के अंतर को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। अध्ययन के अनुसार कीमत में यह अंतर सब्सिडी वाले यूरिया को अनधिकृत तरीके से औद्योगिक इस्तेमाल की ओर भेजे जाने की संभावना को बढ़ा सकता है।

इसका सीधा संबंध सरकारी सब्सिडी में संभावित लीकेज, उद्योगों के बीच प्रतिस्पर्धा और सप्लाई चेन की निगरानी से जुड़े मुद्दों से है। समिति की बैठक में इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

दूसरी बैठक में उर्वरक सब्सिडी और नवाचार योजनाएं

समिति की दूसरी बैठक सुबह 11:30 बजे शुरू होगी। इसमें रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

बैठक में उर्वरक सब्सिडी योजनाओं तथा उर्वरक नवाचार योजनाओं के मूल्यांकन और निगरानी से जुड़े विषय पर विभाग की ओर से ब्रीफिंग दी जाएगी। इसमें इन योजनाओं के संचालन, निगरानी और प्रभाव से संबंधित पहलुओं पर समिति सदस्यों को जानकारी दी जाएगी।

जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाओं पर भी होगी चर्चा

दिन की तीसरी बैठक दोपहर 2:30 बजे शुरू होगी। इसमें फार्मास्युटिकल्स विभाग के प्रतिनिधियों की ओर से ‘जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाएं, खास तौर पर जागरूकता और भरोसे की कमी’ विषय पर ब्रीफिंग दी जाएगी।

जेनेरिक दवाओं को लेकर आम लोगों के बीच जागरूकता और भरोसे से जुड़े सवाल इस बैठक के प्रमुख विषयों में होंगे। समिति दवा क्षेत्र में जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं को लेकर मौजूद धारणा तथा जागरूकता की स्थिति पर जानकारी लेगी।

31 सदस्यीय है संसदीय स्थायी समिति

रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति संसद की 24 विभाग-संबंधी स्थायी समितियों में से एक है। इसे लोकसभा सचिवालय की ओर से सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

समिति में कुल 31 सदस्य हैं, जिनमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से होते हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद इस समिति के अध्यक्ष हैं।

सोमवार को होने वाली तीनों बैठकों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभागीय प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से जानकारी लेकर समिति आगे की समीक्षा और निगरानी की दिशा तय करेगी।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button