
“BSP में आकाश आनंद का भविष्य एक बार फिर चर्चा में है। मायावती ने 3 सितंबर को उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाया। इसके बाद आकाश ने सोशल मीडिया बायो बदलकर खुद को ‘BSP Supporter’ बताया।“
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) में मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच रिश्तों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया। पार्टी प्रमुख ने उन्हें अभी अपरिपक्व बताते हुए कोई जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही है। हालांकि इस बार आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है और उन्हें कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े रहने की बात कही गई है।
पद से हटाए जाने के बाद आकाश आनंद के सोशल मीडिया प्रोफाइल में लगातार बदलाव देखने को मिला है। पहले उन्होंने अपने बायो में ‘BSP Worker’ लिखा था, लेकिन रविवार को इसे बदलकर केवल ‘BSP Supporter’ कर दिया। इस बदलाव ने बसपा में आकाश आनंद की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
बैठकों से आकाश की दूरी ने बढ़ाए सवाल
मायावती ने हाल ही में लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में संगठन से जुड़ी दो अहम बैठकें बुलाई थीं। 31 अगस्त और 3 सितंबर को हुई इन बैठकों में देश और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को बुलाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आकाश आनंद दोनों बैठकों में शामिल नहीं हुए।
इसके बाद 3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपना फैसला सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है, इसलिए उन्हें फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।
इस घटनाक्रम से यह संकेत जरूर मिला कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आकाश आनंद के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। हालांकि दोनों के बीच मतभेदों की वास्तविक वजह को लेकर पार्टी की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोशल मीडिया बायो से निकले कई राजनीतिक मायने
आकाश आनंद के सोशल मीडिया बायो में बदलाव को राजनीतिक हलकों में खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले ‘BSP Worker’ और अब ‘BSP Supporter’ लिखे जाने से उनके पार्टी में मौजूदा कद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले भी आकाश आनंद ने पद से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव किया था। बाद में मायावती ने उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया और फिर चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर का पद सौंपा था।
हालांकि मौजूदा स्थिति में केवल सोशल मीडिया बायो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि आकाश आनंद पार्टी छोड़ने वाले हैं या उन्हें बाहर किया जाएगा। अभी पार्टी की ओर से उन्हें संगठन में बनाए रखने की बात कही गई है।
आकाश आनंद के लिए यह पहली कार्रवाई नहीं
आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में मायावती की ओर से कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। पिछले करीब ढाई वर्षों में वह कई बार पार्टी में अहम जिम्मेदारियों से हटाए जा चुके हैं और फिर वापस लाए गए हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान विवादित बयानों के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक और उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया था। इसके बाद जून 2024 में उन्हें फिर पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।
इसके बाद मार्च 2025 में आकाश आनंद के ससुर और बसपा के वरिष्ठ नेता रहे अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव का हवाला देते हुए उन्हें सभी पदों से हटा दिया गया था। अगले दिन उन्हें पार्टी से निष्कासित भी कर दिया गया। बाद में माफी मांगने के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई।
अब सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें संगठन के शीर्ष पद से हटा दिया गया है।
मायावती ने पार्टी से निकालने के बजाय रखा कार्यकर्ता के तौर पर
इस बार के घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित नहीं किया है। उन्हें केवल जिम्मेदारी से हटाया गया है और पार्टी से जुड़े रहने की बात कही गई है।
यानी फिलहाल आकाश आनंद बसपा में हैं, लेकिन संगठन में उनकी कोई बड़ी औपचारिक जिम्मेदारी नहीं है। यही स्थिति उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या वह दोबारा संगठन में बड़ी भूमिका हासिल करेंगे या पार्टी में उनकी भूमिका सीमित रहेगी।
अशोक सिद्धार्थ का मुद्दा भी चर्चा में
बसपा के भीतर आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के संबंधों को लेकर भी चर्चा होती रही है। मायावती पहले ही अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर चुकी हैं। पार्टी के कुछ नेताओं के बीच यह चर्चा है कि आकाश आनंद पर उनके ससुर का प्रभाव अब भी है।
हालांकि यह पार्टी नेताओं के बीच चल रही चर्चा है और इसके संबंध में कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे आकाश आनंद को हटाए जाने की निश्चित वजह के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
क्या आकाश आनंद को फिर मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी?
आकाश आनंद के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती भविष्य में उन्हें फिर कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देंगी। पिछले घटनाक्रम को देखें तो आकाश को पहले भी हटाया गया, फिर वापस लाया गया और उन्हें पहले से बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं।
लेकिन इस बार लगातार तीसरी कार्रवाई और सोशल मीडिया बायो में बदलाव ने स्थिति को पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर नहीं किया है। ऐसे में आकाश आनंद का अगला राजनीतिक कदम और मायावती का भविष्य का फैसला ही यह तय करेगा कि बसपा में उनकी भूमिका आगे किस रूप में सामने आती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि आकाश आनंद बसपा से जुड़े हुए हैं, लेकिन पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक पद से बाहर हैं। ऐसे में BSP में उनका राजनीतिक भविष्य अभी पूरी तरह मायावती के अगले फैसले पर निर्भर दिखाई देता है।
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