CJP प्रोटेस्ट पर छात्र को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार

CJP प्रोटेस्ट को लेकर ग्रेटर नोएडा के छात्र को नोटिस भेजने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। CJI सूर्यकांत ने मजिस्ट्रेट से सवाल किया और संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने के संकेत दिए।

नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक लॉ छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अदालत ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा रखी थी, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया।

छात्र को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भेजा गया था नोटिस

मामला दूसरे वर्ष के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट-III की अदालत ने छात्र के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी किया था।

पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया गया था कि छात्र विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को प्रस्तावित CJP विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र सरकार विरोधी और कथित तौर पर गुमराह करने वाली बातें छात्रों के बीच फैला रहे थे।

4 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर जवाब मांगा गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नोटिस पर उठे सवाल

यह मामला बुधवार, 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा। वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मुद्दे को मौखिक रूप से उठाया।

उन्होंने बताया कि नोएडा पुलिस की जानकारी के आधार पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दूसरे वर्ष के छात्र को नोटिस जारी किया था। हालांकि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।

वकील ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी किया जाना गंभीर विषय है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका है।

CJI सूर्यकांत ने जताई कड़ी नाराजगी

मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए CJI सूर्यकांत ने सवाल किया कि कोई मजिस्ट्रेट अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है।

CJI ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में किसी भी मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।

अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लेने की बात कही है।

नोटिस वापस लेने के बाद भी मामला क्यों बना रहा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया कि जब नोटिस वापस लिया जा चुका है तो अब कार्रवाई का आधार क्या बचता है।

इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने कहा कि केवल नोटिस वापस ले लेने से कथित अवमानना का मुद्दा खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की गरिमा से जुड़ा मामला बताया।

वकील ने कहा कि नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते। उन्होंने अदालत के आदेश के बावजूद कार्रवाई को प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बताया।

याचिका दाखिल करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने वकील से कहा कि वह इस मामले से संबंधित नोटिस को औपचारिक याचिका के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाएं। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत संबंधित अधिकारी से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगेगी।

इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच करना चाहता है कि उसके पहले के निर्देशों के बावजूद छात्र के खिलाफ नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।

क्या है CJP प्रोटेस्ट का मामला?

यह विवाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में छात्रों की भागीदारी और उससे जुड़े पुलिस-प्रशासनिक कदमों को लेकर मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ग्रेटर नोएडा में एक छात्र को BNSS की धाराओं के तहत नोटिस जारी किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले में स्पष्टीकरण मांगने के संकेत दिए हैं।

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