देवरिया पुलिस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, ‘झूठों का झुंड’; चार लोगों को 65 हजार रुपये मुआवजा

देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों की अवैध हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने 65 हजार रुपये मुआवजे का आदेश दिया, जिसकी वसूली थानाध्यक्ष के वेतन से होगी।

प्रयागराज। देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। महेंद्र गौड़ की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक और थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पुलिस की ओर से दी गई दलीलों पर तीखी मौखिक टिप्पणी करते हुए पुलिसकर्मियों को ‘झूठों का झुंड’ तक कह दिया।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने चार याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि इस राशि की वसूली संबंधित थानाध्यक्ष के वेतन से करने का निर्देश दिया गया है।

13 से 24 अप्रैल के बीच अवैध हिरासत का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया था कि चार लोगों को 13 से 24 अप्रैल के बीच गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। याचिका के मुताबिक, इनमें कुछ लोगों को करीब 10 दिन तक थाने में रखा गया, जबकि अन्य को इससे कम अवधि तक हिरासत में रखा गया था।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मामले में पुलिस की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड और दलीलों की जांच की। कोर्ट ने विशेष रूप से थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं होने पर सवाल उठाया।

‘बिजली नहीं थी, जनरेटर खराब था’ दलील पर कोर्ट नाराज

थानाध्यक्ष की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित अवधि में थाने में बिजली नहीं थी और जनरेटर भी खराब था। इसी वजह से सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो सकी।

हाई कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रत्येक थाने में सीसीटीवी कैमरों का 24 घंटे चालू रहना जरूरी है। इसके साथ ही रिकॉर्ड की गई फुटेज का बैकअप सुरक्षित रखना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।

एसपी की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल

खंडपीठ ने सीसीटीवी और उसके बैकअप की व्यवस्था नहीं होने को पुलिस अधीक्षक की ओर से कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही माना। कोर्ट ने कहा कि थानों में सीसीटीवी व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि हिरासत में रखे गए लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

मामले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर कोर्ट की नाराजगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिरासत से संबंधित मामलों में सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।

चार याचियों को मिलेगा 65 हजार रुपये मुआवजा

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चारों याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक अर्चना गौड़, नंदिनी गौड़ और इन्नी को 20-20 हजार रुपये दिए जाएंगे, जबकि महेंद्र गौड़ को पांच हजार रुपये मुआवजा मिलेगा।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुआवजे की राशि संबंधित थानाध्यक्ष के वेतन से वसूल की जाए। इस आदेश से पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर हाई कोर्ट के सख्त रुख का संकेत मिलता है।

जून में भी अवैध हिरासत पर हाई कोर्ट ने दिया था अहम आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट इससे पहले भी अवैध हिरासत के मामलों में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय कर चुका है। जून में गाजियाबाद निवासी चंद्रपाल पाल सिंह और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखने पर 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा।

उस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने की थी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि दोषी पाए जाने वाले मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से मुआवजे की राशि वसूल की जाए।

डीजीपी को जारी करने पड़े थे निर्देश

जून के आदेश में हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को इस संबंध में आवश्यक परिपत्र जारी करने का निर्देश भी दिया था। इसका उद्देश्य अवैध हिरासत के मामलों में पुलिस की जवाबदेही तय करना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना था।

देवरिया के गौरी बाजार थाने से जुड़े मौजूदा मामले में हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और थानाध्यक्ष के वेतन से मुआवजे की वसूली का आदेश इसी व्यापक न्यायिक रुख को आगे बढ़ाता है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अवैध हिरासत और सीसीटीवी नियमों के पालन में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

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