
“चौधरी चरण सिंह जयंती पर 23 दिसंबर को हापुड़ के नूरपुर में बड़ी जनसभा की तैयारी है। PM मोदी और नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा के बीच BJP-RLD जाट-किसान समीकरण मजबूत करेगा।“
लखनऊ। पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की जयंती पर 23 दिसंबर को हापुड़ के नूरपुर में बड़ी जनसभा आयोजित करने की तैयारी है। यह वही गांव है जिसे चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक और पारिवारिक विरासत से जोड़कर देखा जाता है। प्रस्तावित जनसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा है।
इस आयोजन के जरिए भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और किसान समीकरण को साधने के साथ अपने गठबंधन को और मजबूती देने की कोशिश करेंगे। प्रधानमंत्री की मौजूदगी से जनसभा को राष्ट्रीय स्तर का महत्व मिलने की उम्मीद है।
चौधरी चरण सिंह की विरासत पर BJP-RLD का फोकस
चौधरी चरण सिंह को किसान राजनीति का प्रमुख विचारक माना जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के बीच उनकी राजनीतिक विरासत आज भी प्रभावशाली मानी जाती है। यही वजह है कि उनकी जयंती पर हापुड़ में प्रस्तावित कार्यक्रम को केवल एक सामान्य राजनीतिक सभा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
मोदी सरकार की ओर से चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने के बाद भाजपा और रालोद के रिश्तों में भी नजदीकी बढ़ी। दोनों दलों ने किसान और जाट राजनीति से जुड़े इस भावनात्मक जुड़ाव को राजनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया।
2014 से 2022 तक अलग राह पर थे भाजपा और रालोद
2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक भाजपा और रालोद के बीच राजनीतिक टकराव रहा। इस दौरान रालोद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर भी चुनाव लड़ा।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद प्रमुख जयन्त चौधरी और भाजपा के बीच दूरियां कम हुईं और दोनों दल साथ आ गए। लोकसभा चुनाव में गठबंधन को भाजपा की अपेक्षा के मुताबिक बड़ा चुनावी लाभ भले नहीं मिला, लेकिन दोनों दलों की राजनीतिक साझेदारी जारी रही।
पिछले एक वर्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जयन्त चौधरी कई मौकों पर एक साथ मंच साझा कर चुके हैं।
हापुड़ की सभा को लेकर दिल्ली में हुआ मंथन
भाजपा और रालोद के शीर्ष नेताओं के बीच दिल्ली में हापुड़ में बड़ी जनसभा आयोजित करने को लेकर मंथन हुआ है। चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उनके पैतृक गांव नूरपुर में होने वाली प्रस्तावित सभा को दोनों दल पश्चिमी यूपी में अपने राजनीतिक संदेश को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
भाजपा की रणनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और राजस्थान के जाट मतदाताओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इसी क्रम में जयन्त चौधरी को केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी देकर भाजपा की ओर से विशेष राजनीतिक महत्व दिया गया है।
पश्चिमी यूपी में जाट-किसान समीकरण पर नजर
रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आगे बढ़कर पूर्वांचल और अवध में भी अपना संगठन और जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए पार्टी की ओर से आधा दर्जन से अधिक जनसभाएं आयोजित किए जाने की तैयारी है।
वहीं भाजपा जयन्त चौधरी को साथ लेकर पश्चिमी यूपी में जाट और किसान वोट बैंक को एनडीए के पक्ष में मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। चौधरी चरण सिंह की जयंती पर होने वाली सभा इसी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
PM मोदी की मौजूदगी से मिलेगा राष्ट्रीय संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रस्तावित जनसभा में शामिल होते हैं तो कार्यक्रम का राजनीतिक कद काफी बढ़ जाएगा। चौधरी चरण सिंह की विरासत, किसान राजनीति और भाजपा-रालोद गठबंधन को एक मंच पर लाने से किसानों के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश होगी।
हालांकि, भाजपा की प्रदेश इकाई ने अभी तक प्रधानमंत्री की मौजूदगी या जनसभा के अंतिम कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में पीएम मोदी के शामिल होने की बात फिलहाल संभावित कार्यक्रम के तौर पर ही देखी जा रही है।
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