
“तारा कोल ब्लॉक नीलामी पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। जयराम रमेश ने हसदेव-अरण्य में जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर ‘इकोसाइड’ का आरोप लगाया।“
नई दिल्ली: तारा कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से समृद्ध हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर सवाल उठाते हुए इसे ‘इकोसाइड’ बताया है।
जयराम रमेश ने गुरुवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि तारा कोल ब्लॉक का खनन पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन से किए जा रहे पर्यावरण विनाश का एक और उदाहरण है।
5000 एकड़ में फैला है तारा कोल ब्लॉक
कांग्रेस नेता के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक करीब 5000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें 4000 एकड़ से अधिक हिस्सा घने जंगल का है।
जयराम रमेश ने कहा कि इतने बड़े प्राकृतिक वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई केवल क्षतिपूरक वनीकरण के जरिए नहीं की जा सकती। उन्होंने दावा किया कि खनन के लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का खतरा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदायों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण आधार है।
कांग्रेस ने नीलामी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने तारा कोल ब्लॉक नीलामी के संदर्भ में वर्ष 2022 से लेकर अब तक की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव-अरण्य में नए कोल ब्लॉकों के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग की थी।
इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की आवश्यकता नहीं है।
2023 में 40 कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया से हटाए गए थे
जयराम रमेश ने कहा कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से हटा दिया था।
कांग्रेस नेता का सवाल है कि पहले नीलामी प्रक्रिया से हटाए गए तारा ब्लॉक को अब दोबारा नीलामी में कैसे लाया गया। उन्होंने इसे हसदेव-अरण्य में लंबे समय से चल रहे स्थानीय समुदायों के विरोध के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बताया।
15 वर्षों से जंगल बचाने की लड़ाई का दावा
कांग्रेस के मुताबिक हसदेव-अरण्य क्षेत्र के आदिवासी और अन्य स्थानीय समुदाय पिछले करीब 15 वर्षों से जंगल और अपनी आजीविका की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि स्थानीय लोगों ने ग्रामसभा प्रस्तावों, जनअभियानों, धरना-प्रदर्शनों और मार्च के जरिए अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई है। इनमें रायपुर तक किए गए विरोध मार्च भी शामिल रहे हैं।
खनन से लेमरू हाथी रिजर्व पर असर का दावा
जयराम रमेश ने तारा कोल ब्लॉक में खनन से लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास के क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई। उनके मुताबिक खनन गतिविधियों से हाथियों के आवागमन का कॉरिडोर प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कई अन्य वन्यजीव प्रजातियां भी मौजूद हैं और इनमें से कुछ पहले से ही गंभीर संरक्षण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में खनन गतिविधियों से उनके सामने अतिरिक्त खतरा पैदा हो सकता है।
नीलामी में कौन कंपनी बनी विजेता?
जयराम रमेश ने अपने बयान में दावा किया कि तारा कोल ब्लॉक की हालिया नीलामी में CG Syn-Gas and Chemicals Limited विजेता रही है। उन्होंने कहा कि यह कंपनी Mundra Synenergy Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और Mundra Synenergy, Adani Enterprises Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
कांग्रेस नेता ने इसी कॉरपोरेट संरचना का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाए हैं।
‘तारा (रिवाइज्ड)’ नाम से खनन पर भी सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक को अब ‘Tara (Revised)’ नाम दिया गया है, लेकिन नाम में बदलाव से पर्यावरणीय चिंताएं खत्म नहीं होतीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हसदेव-अरण्य के तारा ब्लॉक में खनन शुरू करना पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों के खिलाफ है। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन से किए जा रहे ‘इकोसाइड’ का उदाहरण बताया है।
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