
“भू-उपयोग परिवर्तन अब यूपी में आसान होगा। योगी कैबिनेट ने 6000 वर्गमीटर तक जमीन के लिए विकास प्राधिकरणों को अधिकार दिया और शुल्क में 50% तक कटौती की।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में अब प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान होगी। राज्य सरकार ने महायोजना और क्षेत्रीय विकास योजना के तहत आने वाले क्षेत्रों की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल करने के साथ ही इसके लिए निर्धारित शुल्क में भी बड़ी कटौती की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 के तृतीय संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
6000 वर्गमीटर तक विकास प्राधिकरण लेंगे फैसला
कैबिनेट के फैसले के तहत अब 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार संबंधित विकास प्राधिकरणों को दिया गया है। इससे ऐसे मामलों में शासन से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
वहीं, 6000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में शासन की अनुमति लेनी होगी। इससे छोटे और मध्यम आकार के भू-उपयोग परिवर्तन मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो सकेगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत बदली व्यवस्था
विभागीय विशेष सचिव राजेश कुमार राय के मुताबिक, अभी भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों का अधिकार राज्य सरकार के स्तर पर था। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डी-रेगुलेशन कार्ययोजना के तहत प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटलीकरण और भूमि संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसी के तहत दूसरे राज्यों में लागू भू-उपयोग परिवर्तन की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भी 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के मामलों का अधिकार विकास प्राधिकरणों को देने का निर्णय लिया गया है। राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू होने का भी उल्लेख किया गया है।
कृषि से औद्योगिक उपयोग में शुल्क 20 से घटकर 15 प्रतिशत
सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों में भी बदलाव किया है। कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में बदलने के लिए अब सर्किल रेट का 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा। पहले यह दर 20 प्रतिशत थी।
इस बदलाव से कृषि भूमि पर उद्योग स्थापित करने के लिए भू-उपयोग परिवर्तन कराने वाले आवेदकों को शुल्क के स्तर पर राहत मिलेगी।
आवासीय भू-उपयोग के लिए शुल्क हुआ आधा
आवासीय उपयोग के लिए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को भी कम किया गया है। पहले सर्किल रेट का 50 प्रतिशत शुल्क निर्धारित था, जिसे अब 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
यानी आवासीय उपयोग में भूमि परिवर्तन के लिए निर्धारित शुल्क की दर में 25 प्रतिशत की कमी की गई है।
कार्यालय उपयोग में 100 से घटकर 50 प्रतिशत शुल्क
कार्यालय उपयोग के लिए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को 100 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया गया है।
इस बदलाव के बाद कार्यालय से संबंधित परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग बदलने पर पहले की तुलना में कम परिवर्तन शुल्क देना होगा।
वाणिज्यिक उपयोग के लिए शुल्क 150 से घटकर 75 प्रतिशत
वाणिज्यिक उपयोग के मामले में भी शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। पहले सर्किल रेट का 150 प्रतिशत परिवर्तन शुल्क निर्धारित था, जिसे अब 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की लागत कम होगी।
मिश्रित उपयोग में भी शुल्क घटा
मिश्रित उपयोग वाली भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए भी नई दर लागू होगी। पहले सर्किल रेट का 125 प्रतिशत शुल्क लिया जाता था, जिसे अब घटाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस तरह मिश्रित उपयोग की श्रेणी में भी परिवर्तन शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है।
पहले से कुछ योजनाओं में विकास प्राधिकरणों को अधिकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ विशेष योजनाओं के तहत भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार पहले ही विकास प्राधिकरणों को दिया हुआ है।
उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत परियोजना के लिए लाइसेंस हासिल करने वाले विकासकर्ताओं की भूमि के भू-उपयोग से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था लागू है। इसी तरह मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में परिवर्तित करने का अधिकार भी विकास प्राधिकरणों को दिया जा चुका है।
अब सामान्य मामलों में 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों को मिलने से व्यवस्था का और अधिक विकेंद्रीकरण होगा।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
सरकार के इस फैसले से भू-उपयोग परिवर्तन के लिए शासन स्तर पर जाने वाले छोटे क्षेत्रफल के मामलों की संख्या कम होगी। 6000 वर्गमीटर तक के मामलों का निर्णय संबंधित विकास प्राधिकरण के स्तर पर होने से प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
इसके साथ ही विभिन्न श्रेणियों में शुल्क कम होने से भूमि का औद्योगिक, आवासीय, कार्यालय, वाणिज्यिक या मिश्रित उपयोग में परिवर्तन कराने की लागत भी पहले की तुलना में कम होगी।
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बदलाव
| उपयोग की श्रेणी | पहले शुल्क | अब शुल्क |
|---|---|---|
| कृषि से औद्योगिक | 20% | 15% |
| आवासीय | 50% | 25% |
| कार्यालय | 100% | 50% |
| वाणिज्यिक | 150% | 75% |
| मिश्रित उपयोग | 125% | 65% |
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