लखनऊ में मोबाइल की किस्त नहीं चुकाने पर युवक को बनाया बंधक, जबरन निकलवाया खून; चार दिन कराई मजदूरी

लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की किस्त वसूली के नाम पर युवक को बंधक बनाने और जबरन खून निकलवाने का आरोप है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।

लखनऊ। राजधानी के निगोहां क्षेत्र में मोबाइल की किस्त वसूलने के नाम पर एक युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने, मारपीट करने, जबरन मजदूरी कराने और उसका खून निकलवाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों अनिकेत सिंह उर्फ काका और सुशांत शर्मा को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी बताए जा रहे शुभम सिंह की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच में कथित ब्लड सेंटर की भूमिका भी सामने आई है।

8 सितंबर को युवक को साथ ले जाने का आरोप

पुलिस के अनुसार निगोहां के राजारामखेड़ा गांव निवासी नेवल कुमार ने किस्त पर मोबाइल फोन खरीदा था। परिवार की शिकायत के मुताबिक 8 सितंबर को शुभम सिंह अपने एक साथी के साथ गांव पहुंचा और नेवल को मोबाइल की दुकान पर ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गया।

इसके बाद नेवल कई दिनों तक घर वापस नहीं लौटा। परिवार को बाद में जानकारी हुई कि उसे कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस के अनुसार 14 सितंबर को नेवल की मां ने मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।

चार दिन तक बंधक रखकर मजदूरी कराने का आरोप

पुलिस की जांच के मुताबिक युवक को कथित तौर पर शुभम के घर में करीब चार दिन तक रखा गया। इस दौरान उससे मजदूरी कराई गई। आरोप है कि उससे घर की छत का प्लास्टर और दीवार का काम भी कराया गया तथा उसके साथ मारपीट की गई।

पुलिस के अनुसार परिजनों से मोबाइल की बकाया किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर भी कराए गए। रकम मिलने के बावजूद युवक को तत्काल नहीं छोड़ा गया।

ब्लड सेंटर ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू युवक का कथित रूप से जबरन रक्त निकलवाना है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने नेवल को बुद्धेश्वर स्थित समाधान चैरिटेबल ब्लड सेंटर ले जाने और वहां उसका एक यूनिट रक्त निकलवाने की बात बताई है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि रक्त किस परिस्थिति में निकाला गया, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित तौर पर रक्त की बिक्री कैसे हुई। ब्लड सेंटर से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

रिकवरी एजेंट और मैनेजर के रूप में काम करने का दावा

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी सुशांत शर्मा ने पूछताछ में खुद को टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज लिमिटेड में मैनेजर बताया है। पुलिस का कहना है कि शुभम सिंह कंपनी से जुड़े फील्ड एजेंट के तौर पर और अनिकेत सिंह भी किस्त वसूली का काम करता था।

पुलिस के अनुसार आरोपियों का कहना है कि वे पहले भी नेवल के घर किस्त लेने गए थे, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद उसे सबक सिखाने की योजना बनाने की बात सामने आई है। इन बयानों की पुष्टि के लिए पुलिस अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश

डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के निर्देशन में मामले की जांच के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गईं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों की तलाश की।

17 सितंबर को पुलिस ने अनिकेत सिंह उर्फ काका और सुशांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। वहीं मुख्य आरोपी शुभम सिंह समेत अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

ब्लड सेंटर की भूमिका की भी जांच

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर युवक को जिस ब्लड सेंटर ले जाया गया, वहां रक्त निकालने की प्रक्रिया कैसे हुई और क्या इसके लिए युवक की सहमति ली गई थी। जांच में सेंटर से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

निगोहां थाने में दर्ज हुआ मुकदमा

पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर निगोहां थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल पुलिस के सामने मुख्य चुनौती फरार आरोपी को पकड़ने के साथ युवक को कथित रूप से ब्लड सेंटर ले जाने और रक्त निकलवाने की पूरी घटना की पुष्टि करना है। मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाल रही है।

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