
“बाराबंकी में 496 एकड़ में दो बड़े औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। लखनऊ-अयोध्या मार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़े इन क्षेत्रों में स्टार्टअप, उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा करीब 25 हजार रोजगार सृजन का लक्ष्य है।“
बाराबंकी। राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। लखनऊ-अयोध्या मार्ग और लखनऊ-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़े दो बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को स्टार्टअप इकोसिस्टम के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। करीब 496 एकड़ क्षेत्रफल में तैयार हो रहे इन दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश और नई औद्योगिक इकाइयों के आने से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लखनऊ के आसपास स्टार्टअप और नवाचार आधारित औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की मंशा के तहत इस दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। स्टार्टअप इंडिया की टीम भी इस क्षेत्र में संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की योजना औद्योगिक निवेश के साथ युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार करने की है।
496 एकड़ में दो औद्योगिक क्षेत्र होंगे विकसित
बाराबंकी में दो प्रमुख स्थानों पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। पहला औद्योगिक कॉरिडोर रामसनेहीघाट के कंधईपुर में करीब 260 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी कंपनियों ने औद्योगिक भूखंड लेने में रुचि दिखाई है।
बताया गया है कि यहां 500 से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियों के लिए भूखंड को लेकर सहमति मिली है। इनमें करीब 40 कंपनियां अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की तैयारी में हैं। इससे क्षेत्र में उत्पादन, कारोबार और रोजगार की गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
दूसरा औद्योगिक क्षेत्र पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सतरही-बम्हरौली क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यूपीसीडा की ओर से करीब 236 एकड़ में इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास की तैयारी है। एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए खासा आकर्षक बना रही है।
एक्सप्रेसवे और राजमार्ग की कनेक्टिविटी बनेगी ताकत
बाराबंकी की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मानी जा रही है। जिला राजधानी लखनऊ के करीब है और यहां से लखनऊ-अयोध्या मार्ग के साथ-साथ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चे माल की आवाजाही और तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में बेहतर परिवहन नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि निवेशकों की नजर बाराबंकी पर टिक रही है।
लखनऊ के नजदीक होने के कारण कंपनियों को राजधानी की सुविधाओं और बड़े बाजार का लाभ भी मिल सकता है। वहीं पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच को आसान बनाती है।
कई कंपनियों ने निवेश में दिखाई रुचि
औद्योगिक क्षेत्रों में अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें ट्रांसफार्मर निर्माण, फूड प्रोसेसिंग, होटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑर्गेनिक उत्पाद, हाउसिंग, फिल्म स्टूडियो, मेडिकल शिक्षा, मनोरंजन और बायोसाइंस से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाओं में अर्चियन फूड्स, जेपी मेरिआट होटल, रोहन फूड्स, वैदही इंफ्रा टेक्नोलॉजी, अभ्युदय आर्गेनिक, सिंह इंफ्रा हाउसिंग, द इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड, गणपति एई बिजनेस आयल, लखनऊ फिल्म स्टूडियो, बोधिसत्वा मेडिकल यूनिवर्सिटी, फन जंक्शन और एग्रीनेक्स बायोसाइंस जैसी इकाइयों के नाम शामिल हैं।
इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से बाराबंकी में औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
बाराबंकी में औद्योगिक विकास की योजना केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। सरकार यहां स्टार्टअप, नवाचार और नई तकनीक आधारित कारोबार को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
नई नीति-2026 में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास के लिए मिशन टीम गठित करने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत स्टार्टअप को वित्तीय प्रोत्साहन, मैचिंग अनुदान और ब्याज अनुदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
इसका उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है। बाराबंकी और लखनऊ के आसपास स्टार्टअप के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होने से स्थानीय स्तर पर नए कारोबार और तकनीकी उद्यम विकसित होने की संभावना है।
करीब 25 हजार रोजगार का लक्ष्य
प्रस्तावित औद्योगिक निवेश का सबसे बड़ा असर रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री जिला उद्यमी मित्र एफ. रहमान के अनुसार, प्रस्तावित निवेश और औद्योगिक इकाइयों से करीब 25 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
औद्योगिक इकाइयों में सीधे रोजगार के अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, खान-पान, सर्विस सेक्टर और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे आसपास के गांवों और कस्बों की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की योजना
स्टार्टअप और औद्योगिक इकोसिस्टम के विस्तार का सीधा लाभ जिले के युवाओं को मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर कंपनियों और नई इकाइयों के आने से रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि औद्योगिक इकाइयों के साथ प्रशिक्षण, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय सहायता की सुविधाओं को भी मजबूत किया जाता है तो बाराबंकी में एक व्यापक उद्यमिता इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है।
लखनऊ के आसपास औद्योगिक विस्तार को मिलेगा बल
बाराबंकी में विकसित किए जा रहे ये औद्योगिक क्षेत्र लखनऊ के आसपास तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक नेटवर्क का भी हिस्सा हैं। राजधानी में जमीन और औद्योगिक विस्तार की सीमाओं के बीच आसपास के जिलों में बेहतर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को विकसित करना सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाराबंकी की लखनऊ से नजदीकी, अयोध्या मार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी इसे इस लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। आने वाले समय में यदि प्रस्तावित निवेश समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतरते हैं तो बाराबंकी पूर्वी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और स्टार्टअप गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
496 एकड़ में दो औद्योगिक कॉरिडोर और करीब 25 हजार रोजगार का लक्ष्य बाराबंकी के औद्योगिक भविष्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन और बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के सहारे जिले में पारंपरिक उद्योगों के साथ नवाचार आधारित कारोबार को भी बढ़ावा देने की कोशिश है।
अब इन औद्योगिक क्षेत्रों में प्रस्तावित कंपनियों की इकाइयां कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं और स्टार्टअप के लिए तैयार किया जा रहा इकोसिस्टम कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले समय में बाराबंकी की आर्थिक तस्वीर तय करेगा।
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